Tue 02 Jun 2026
Breaking News Exclusive
2100 कमल पुष्पों से सजा श्रीजगन्नाथ जी का सिंहासन, इस्कॉन मंदिर में आयोजित किया कमल तलाई मनोरथ मासिक धर्म को लेकर करें खुलकर बात- डॉ. खुशबू केसरवानी अधिकमास के 11वें दिन धूमधाम से संपन्न हुआ तुलसी विवाह, बैंड-बाजों के साथ निकली ठाकुर जी की बारात नवजातों की जीवन-रक्षा के लिए अपना दुग्ध दान करने वाली माताओं को दिया माँ यशोदा गौरव सम्मान श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज के मंदिर में हुआ दान लीला (दान एकादशी) का आयोजन गंगा दशहरा और एकादशी पर सेवा का संदेश, राहगीरों को वितरित किया शरबती दूध और छाछ सामाजिक सरोकारों के साथ फेयरफील्ड बाय मैरियट ने मनाई तीसरी वर्षगांठ गोल्डन मिनट्स में नवजात की जान बचाने को होगा प्रशिक्षण क्षत्रिय समाज में एकता के संकल्प के साथ महाराणा प्रताप जयन्ती पर धूमधाम से निकाली शोभायात्रा राजपुर चुंगी से शमशाबाद मार्ग तक गूँजे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जयकारे

सूचना

Pragya News 24 is News Blog to Providing all over News of World.

श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ : भक्ति की गहराई और जीवन के संदेश, रासलीला व रुक्मणि विवाह ने दिया आत्मिक संतुलन का पाठ

आगरा। रासलीला केवल एक दिव्य नृत्य नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के शाश्वत मिलन का प्रतीक है। छठवे दिवस की कथा में रास की महिमा, एकादशी व्रत का महत्व, कृष्ण के मथुरा गमन और रुक्मणि हरण-विवाह जैसे पवित्र प्रसंगों ने भक्तों को भक्ति और प्रेम के वास्तविक अर्थ का अनुभव कराया।

कमला नगर स्थित भोले बाबा पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस शुक्रवार को कथा में व्यास आचार्य ब्रजकिशोर वशिष्ठ ‘भैया जी’ ने कथा का आरंभ रासलीला के दिव्य महत्व से किया। उन्होंने बताया कि रासलीला वह पवित्र अवस्था है जहाँ गोपियों की निस्वार्थ भक्ति और भगवान की अनुकंपा एकाकार होकर भक्ति की पराकाष्ठा को प्रकट करती है।

रासलीला के भावपूर्ण वर्णन के दौरान पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रहे।
कथा के अगले प्रसंग में नंद बाबा द्वारा किए गए एकादशी व्रत का महत्व बताया गया। कथा व्यास ने समझाया कि एकादशी का व्रत मन, विचार और कर्म को पवित्र बनाने का माध्यम है। यह व्रत भक्त को संयम, साधना और भगवान पर निर्भरता सिखाता है। इसके पश्चात कथा व्यास ने भगवान कृष्ण के मथुरा गमन का प्रसंग सुनाया। गोकुल की रक्षा हेतु कृष्ण के इस निर्णय ने पांडाल में भावुकता और उत्साह दोनों ही भावों को जन्म दिया।

कथा का शिखर प्रसंग रुक्मणि हरण और विवाह रहा।
रुक्मणि के मंगल संदेश से लेकर कृष्ण का रथ लेकर कुंडिनपुर पहुँचना, रुक्मणि का हर ले आना और द्वारका में दिव्य विवाह। इन सबका वर्णन करते हुए पांडाल ‘जय श्री रुक्मणि-वल्लभाय नमः’ के जयकारों से गूँज उठा। कृष्ण-रुक्मणि विवाह के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वरूपों की आरती उतारी और मंगल ध्वनियों के बीच विवाह की बधाइयाँ दीं।

इस अवसर पर मुख्य यजमान कृष्ण मिश्र तथा दैनिक यजमान देवेंद्र शर्मा, राजीव शर्मा और मुकेश अग्रवाल ने विधि-विधान से व्यास पूजन और आरती संपन्न की।

कार्यक्रम में मुख्य व्यवस्थापक योगेश जैसवाल, रवि अग्रवाल, योगेश गुप्ता, राजीव गुप्ता, मनोज गुप्ता, देवेंद्र सिंघल, लोकेश गर्ग, जीएस जैन, डॉ. संजय धवन, हिना छाबड़ा, राजकुमार गुप्ता, राधे बाबू, मनीष गुप्ता, पारुल जैसवाल, प्रियंका मिश्रा, यश्वी गोयल, राधा शर्मा, राजेश्वरी शर्मा, ममता गुप्ता, आशा मिश्रा, लक्ष्मी, माया, सुमन, प्रतुल, प्रीति गुप्ता आदि उपस्थित रहीं।

Tags :

Agra News

Pragya News

Uttar Pradesh News

UP News

Dharmik

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन