Mon 15 Jun 2026
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क़िस्सा कहानी : आँखों के सामने घट रही घटना पर हाथ तो छोड़िये, मुँह नहीं खोल सकते

आगरा। "मेरे नजरिये से इसमें दम नहीं है; आखिर जिस देश के लोग अपनी बहन-बेटियों की रक्षा नहीं कर सकते, आँखों के सामने घट रही घटना पर हाथ तो छोड़िये, मुँह नहीं खोल सकते, वह दुनियाँ की सुरक्षा किस नैतिक बल पर करेंगे। मेरे नजरिये से, वर्तमान भारत में धनी आदमी जिस कदर हर जगह हावी होते जा रहे हैं, तो भारत के संविधान की प्रस्तावना कुछ ऐसा पढ़ा जाना चाहिए...हम भारत (न्यू) के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण धनराज और यमराज वाला गणराज्य बनाने के लिए संकल्पित करते हैं!"

यह अंश है वरिष्ठ हिंदी कथाकार दीर्घ नारायन की कहानी 'भारत (न्यू) लोग' का। पूर्णिया (बिहार) के वरिष्ठ कथाकार श्री नारायण आज यहां 'क़िस्सा कहानी-7' में उद्घाटनकर्ता के रूप में अपनी कहानी का पाठ कर रहे थे। 'नागरी प्रचारिणी सभा' के लाइब्रेरी हॉल में होने वाले उक्त कार्यक्रम की प्रस्तुति सांस्कृतिक संस्था 'रंगलीला' और कहानी की पत्रिका 'कथादेश' (नयी दिल्ली) ने की। इसका आयोजक था एसिड हमलों की शिकार महिलाओं का संगठन 'शीरोज़' ।

'नागरी प्रचारिणी सभा' के आतिथ्य में आयोजित उक्त कार्यक्रम में मुख्य वक्ता वरिष्ठ रंगकर्मी और लेखिका प्रो. ज्योत्स्ना रघुवंशी ने कहा, "यह कहानी और रिपोर्ताज का मिला-जुला सामाजिक यथार्थ है। जो चौंकाता नहीं, जड़ कर देता है। हमारी सारी चेतना को निस्तेज करता है। ये समाज की कड़वी सच्चाई है, मैं इस कहानी को पढ़ने के बाद कई दिन परेशान सी रही, दोबारा पढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।"

मुख्य अतिथि लेखक और चिकित्सक डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने कहा निर्भया केस हमारे अंतर्मन झकझोर देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कैसे जघन्य अपराधी बच जाते हैं। 'कथादेश', नई दिल्ली के संपादक हरिनरायन की गरिमामय उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथि अरुण डंग ने विश्व समाज के बदलते हालातों पर चिंता जताते हुए लोगों से संवेदनशील होने की अपील भी की। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ कथाकार शक्ति प्रकाश ने किया। उन्होंने विचार व्यक्त करते हुए कहा कहानी को पढ़ने के बाद कुछ कमी भी महसूस हुई हैं। लेखक ने इस कहानी में एक किशोरी को महज प्रतीक बना दिया है, उसे जीवित पात्र नहीं बनाया। अध्यक्षता वरिष्ठ रचनाकार रमेश पंडित ने करते हुए कहा रक्षा संपदा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए करीब 70 कहानी लिखीं, जिनमें से काफी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। शुरू में विषय प्रवर्तन रंगलीला के निर्देशक अनिल शुक्ल ने किया।

मंच संचालन उर्दू लेखिका और कथाकार प्रो० नसरीन बेगम ने किया। अतिथियों का स्वागत अर्जुन सवेदिया, डॉ. महेश धाकड़ राम भरत उपाध्याय, शंकर देव तिवारी और अर्निका माहेश्वरी ने किया। कहानी पाठ समाप्ति पर श्रोताओं/दर्शकों ने कहानी पर प्रतिक्रिया देते हुए जिज्ञासापूर्ण सवालात पूछे। रामनाथ, डॉ. पीएस कुशवाह, डॉ. सुरेंद्र सिंह ने विचार रखे। प्रो. सुषमा सिंह, प्रो. आभा चतुर्वेदी, शलभ भारती, भावना रघुवंशी, रुनू दत्ता, राम शर्मा, दिलीप रघुवंशी, प्रो.कमलेश नागर, सुनीत कुलश्रेष्ठ आलोक, डॉ.कुमकुम श्रीवास्तव, सुनयन शर्मा, ओम ठाकुर, डॉ.राजीव शर्मा निस्पृह, अमरजीत सिंह, शिव नारायण सिंह, रोमी चौहान, शुभम जाखड़, रंजीत गुप्ता, नरेश तन्हा, कामेश मिश्र सनसनी, अभिषेक माहेश्वरी आदि थे।

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