: युवा ज्ञान और शक्ति से डेंगू मिटेगा बस्ती से
Wed, Dec 11, 2024
युवाओं के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने 200 हाई रिस्क बस्तियों में डेंगू का प्रसार किया नियंत्रित
200 बस्तियों में पहले मिले 16 डेंगू मरीज, अब केवल एक मिला
आगरा, 11 दिसंबर 2024। गढ़ी हुसैनी, सीतानगर, नगला भारती, सराय मलूक चंद, सराय ख्वाजा, मोहनपुरा, जेपी नगर, इस्लामनगर, बापू नगर जैसी 200 हाई रिस्क बस्तियों को स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबेड परियोजना के प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय युवाओं के सहयोग से डेंगू के प्रसार को नियंत्रित किया। वर्ष 2023 में इन 200 हाई रिस्क बस्तियों में 16 डेंगू के मरीज मिले थे, जबकि 2024 में इन बस्तियों में केवल एक ही डेंगू का मरीज मिला है। यह कमाल स्वास्थ्य विभाग के साथ काम कर रहे सीतानगर निवासी ओम गुप्ता और गढ़ी हुसैनी निवासी ज्योति कुमारी जैसे युवा स्वयंसेवकों ने कर दिखाया है। उन्होंने दिखाया कि क्षेत्रीय नागरिकों की जागरुकता से क्षेत्र को सुरक्षित और रोगमुक्त बनाया जा सकता है।
गढ़ी हुसैनी निवासी ज्योति कुमारी बताती हैं कि वह पढ़ाई कर रही हैं। इसके साथ ही वह स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबेड संस्था के साथ अपने क्षेत्र में मच्छर जनित बीमारियों के उन्मूलन के लिए भी युवा स्वयंसेवक के रूप में कार्य करती हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले हमने अपने घर को मच्छर जनित रोगों से मुक्त किया। इसके लिए अपने घर के आस-पास के 200 मीटर के दायरे में मच्छरों के पनपने के कारणों जैसे- गमलों, टायरों और कूलर में भरे साफ पानी को हटाया। इसके बाद में अपने क्षेत्र में भी यही प्रक्रिया दोहराई। उन्होंने बताया कि पहले उनके क्षेत्र में दो डेंगू के मरीज मिले थे, लेकिन इस साल एक भी डेंगू का मरीज नहीं मिला है।
सीतानगर निवासी ओम गुप्ता ने बताया कि हमने अभियान के तहत लोगों को जागरुक किया। उन्हें बताया कि साफ पानी में डेंगू का मच्छर पनपता है। इससे बचाव के लिए अपने क्षेत्र में पानी का जमाव न होने दें। इसके साथ ही टीम के साथ क्षेत्र में मच्छरों के लार्वा को ढूढ़कर उनका सोर्स रिडक्शन कराया। दो माह से मेरे क्षेत्र में मच्छर जनित रोगों से संबंधित कोई केस नहीं आया है मैं आशा करता हूं कि यह स्थिति लगातार बनी रहे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जनपद आगरा के शहरी क्षेत्र में डेंगू , मलेरिया, चिकनगुनिया जैसे मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए जनपद आगरा में फैमिली हेल्थ इंडिया गोदरेज और ज़िला स्वास्थ्य समिति के सहयोग से एंबेड संस्था मच्छर जनित बीमारियों के उन्मूलन परियोजना का संचालन 2022 से कर रही है। इस परियोजना में क्षेत्रीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें स्वयंसेवक बनाया गया और उनको प्रशिक्षित कर विभाग की टीम और एंबेड संस्था के सदस्यों ने विभिन्न स्तर पर अभियान चलाकर 200 हाई रिस्क बस्तियों से डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसे रोगों का उन्मूलन किया।
वेक्टर बॉर्न रोगों के नोडल अधिकारी डॉ. एसएम प्रजापति ने बताया कि एंबेड संस्था जनपद में 357 लक्षित मलिन बस्तियों में मच्छर जनित बीमारियों के उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग का सहयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 200 हाई रिस्क बस्तियों को चिन्हित कर उनमें विशेष अभियान संचालित किया गया। इसमें क्षेत्रीय युवा स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई और हमें मच्छर जनित रोगों की रोकथाम में सफलता प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि जिन हाईरिस्क 200 बस्तियों में साल 2023 में 16 डेंगू के मरीज मिले थे, उनमें साल 2024 में केवल एक ही डेंगू का मरीज मिला।
जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि एंबेड संस्था की बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन फेसिलिटेटर नीरज कुमारी और श्वेता के द्वारा हाई रिस्क बस्तियों में युवाओं का चिन्हांकन करके उन्हें सिविक एक्शन कार्यक्रम के तहत विगत वर्ष जिन बस्ती में डेंगू के मरीज पाए गए उन बस्ती को सिविक एक्शन कार्यक्रम में शामिल किया गया और बस्ती के युवाओं को संचारी रोग की जानकारी बैठकों के माध्यम से युवाओं को दी गई । उन्हें मच्छर पनपने के कारणों, मच्छर जनित रोगों, डेंगू के लार्वा और उसका सोर्स रिडक्शन करने के बारे में प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों में युवा स्वयंसेवकों को शामिल करके लोगों को जागरुक किया गया। एफएचआई संस्था ( फैमिली हेल्थ इंडिया), एंबेड परियोजना के प्रतिनिधियों के द्वारा मच्छर जनित रोगों और डेंगू बचाव और जागरूकता गतिविधियों में सहयोग किया जा रहा है। एफएचआई, फैमिली हेल्थ इंडिया संस्था, एंबेड परियोजना के सिटी कोऑर्डिनेटर इरशाद खान, यूथ कोऑर्डिनेटर मोहित शर्मा, बीसीसीएफ कार्यकर्ता और युवा स्वयंसेवक के द्वारा मच्छर जनित रोगों और डेंगू बचाव जागरूकता गतिविधियों में सहयोग किया जा रहा है।
सहायक मलेरिया अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबेड परियोजना के कार्यकर्ताओं ने हाई रिस्क बस्तियों में सर्वे करके, सामुदायिक बैठकों का आयोजन करके लोगों को मच्छर जनित रोगों और उनसे बचाव के संबंध में लोगों को जागरुक किया। लोगों को बताया कि अपने आसपास पानी को जमा न होने दें, क्योंकि यहीं पर मच्छर पनपते हैं। इसके साथ ही इन बस्तियों में अभियान चलाकर युवा स्वयंसेवकों और टीम के द्वारा कूलर, गमलों, टायरों मं भरे पानी को साफ किया। इसके साथ ही 800 घरों में डेंगू का लार्वा चिन्हित करके उसका सोर्स रिडक्शन किया गया। साथ में नगर निगम के सहयोग से इन बस्तियों में तय रोस्टर के तहत एंटी लार्वा का छिड़काव भी कराया गया। उन्होंने बताया कि अभी आगरा में 32 मलिन बस्तियों में 32 स्वयं सेवक दैनिक तौर पर कार्य कर रहे हैं। जबकि लगभग 1200 युवा स्वयं सेवक इस कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं जो समय समय पर सुविधानुसार संचारी रोगों से बचने के लिए मुहिम का हिस्सा हैं।
आप भी अपने क्षेत्र को मच्छर जनित रोगों से बचाएं -
अपने घर के 200 मीटर के आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखें और कहीं भी पानी जमा न होने दें। पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं।
सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, विशेष रूप से उन जगहों पर जहां मच्छर अधिक होते हैं।
मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े और लंबी पैंट पहनें।
घर में मच्छर भगाने वाले इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग करें, जैसे कि लिक्विड रिपेलेंट मशीनें।
घर के दरवाजों और खिड़कियों पर मच्छरदानी या जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।
पानी के टंकी, बाल्टी और अन्य पानी के बर्तन को ढक कर रखें।
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा समय-समय पर मच्छर जनित रोगों की जांच कराएं और किसी भी असामान्य लक्षणों पर ध्यान दें।
: टीबी मरीजों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
Tue, Dec 3, 2024
यूपीएचसी हरीपर्वत वेस्ट (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) में टीबी मरीजों ने किया पौधरोपण
पर्यावरण की रक्षा करने की अपील की
आगरा। पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए मंगलवार को यूपीएचसी हरीपर्वत वेस्ट (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) में टीबी मरीजों ने पौधरोपण करके संदेश दिया। टीबी मरीजों ने कहा अब हम अन्य लोगों को भी अपने आसपास पेड़ों की रक्षा करने और नए पौधे लगाकर उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करेंगे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि पर्यावरण हम सभी के लिए हितैषी है और बीमारों को स्वस्थ करने के लिए दवा के रूप में कार्य करता है। टीबी मरीजों को भी स्वच्छ और हरे-भरे वातावरण की आवश्यकता होती है। टीबी मरीजों ने पौधरोपण करके एक नई पहल की शुरूआत की है, जो कि सराहनीय है। उन्होंने बताया कि जिनको भी टीबी के लक्षण हैं, वह अपनी टीबी की जांच कराएं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी की जांच व उपचार का पूर्णतया प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हम एक-एक टीबी के मरीज को खोजकर उसका उपचार नहीं करेंगे तब तक टीबी हम सभी के बीच में छिपकर बैठा रहेगा। हम सबको मिलकर देश को टीबी मुक्त करना है।
यूपीएचसी हरीपर्वत वेस्ट की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीनम चतुर्वेदी ने बताया कि पौधरोपण कार्यक्रम में हमने अपने टीबी मरीजों को विशिष्ट अतिथि बनाया और उनसे पौधरोपण कराया। इससे आम जनमानस में दो संदेश पहुंचेंगे। पहला टीबी मरीज भी हम सभी की तरह आम लोग हैं, वह बस कुछ समय के लिए उपचार करा रहे हैं और उसके बाद वह भी स्वस्थ हो जाएंगे। दूसरा हमें पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अभी भी टीबी मरीजों से भेदभाव के मामले सामने आते हैं जो कि पूर्णतया गलत है। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों से भेदभाव न करें और पर्यावरण की रक्षा करें।
पौथरोपण करने के बाद में 20 वर्षीय टीबी मरीज ज्योत्सना (बदला हुआ नाम) ने बताया कि मुझे टीबी के लक्षण होने पर जांच कराई गई, इसके बाद में मेरा उपचार चल रहा है। अब में पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं। आज पौधरोपण करने के बाद में मुझे काफी अच्छा लगा। अब मैं अपने सभी दोस्तों और परिवार के सदस्यों से पर्यावरण संरक्षण करने के लिए कहूंगी।
45 वर्षीय टीबी मरीज अंजू (बदला हुआ नाम) ने बताया कि पहले टीबी के नाम से डर लगता था, मुझे जांच कराने में भी डर लग रहा था लेकिन अब मैं टीबी का उपचार सफलतापूर्वक करा रही हूं। मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही है। वातावरण में प्रदूषण होने पर मुझे दिक्कत होती है। इसलिए हम सभी को पर्यावरण संरक्षण करना चाहिए और अपने आसपास लगे पेड़ों को काटने से बचाना चाहिए।
इस मौके पर फार्मासिस्ट प्रेम सिंह, स्टाफ नर्स संध्या, एएनएम अर्चना आशा कार्यकर्ता भारती और डॉली सहित टीबी मरीजों मौजूद रहे ।
: होम्योपैथिक में विश्व पटल पर आगरा की धाक, नेमिनाथ हॉस्पिटल को जर्मनी ने दिया उत्कृष्ट कार्य का सम्मान
Tue, Dec 3, 2024
कैंसर रोग के इलाज में विशिष्ट कीर्तिमान स्थापित करने के लिए नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ प्रदीप गुप्ता हुए सम्मानित
होम्योपैथिक चिकित्सा के जनक डॉ सैमुअल हैनिमैन को समर्पित संस्था इंटरनेशनल हैनिमैन जेंट्रम टोरगो की टीम ने दिया सम्मान
आगरा। जिस बीमारी से पूरी तरह छुटकारा दिलाने के लिए सारी दुनिया के चिकित्सक वर्षाें से गहन शाेध में जुटे हुए हैं, उस बीमारी से राहत और सफल इलाज का कीर्तिमान बनाने वाले आगरा के डॉ प्रदीप गुप्ता को जर्मनी की संस्था ने उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया। मंगलवार को कुबेरपुर स्थित नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन से हुआ।
होम्योपैथिक के जनक डॉ सैमुअल हैनिमेन की विरासत को संभालने वाली संस्था इंटरनेशनल हैनिमैन जेंट्रम टोरगो, जर्मनी की चेयरपर्सन कैरोला शुएरेन ने नेमिनाथ होम्योपैथिक कॉलेज को द बेस्ट होम्योपैथिक टीचिंग हॉस्पिटल इन इंडिया सम्मान से सम्मानित किया। ये सम्मान कॉलेज के प्रचार्य डॉ प्रदीप गुप्ता को प्रदान किया गया।
कैरोला शुएरेन ने कहा कि आधुनिक विज्ञान आज भी कैंसर से पूरी तरह से जीत नहीं पाया है किंतु पूरे विश्व में कैंसर बीमारी को हराने में बहुत अधिक सफल हुए डॉ प्रदीप गुप्ता भारत सहित पूरे विश्व के लिए सम्मान के पात्र हैं। कॉलेज ने अपने शाेध एवं चिकित्सा पद्वति से सैंकड़ों लोगों को कैंसर बीमारी और उसके दुष्प्रभावों में राहत दी है। उनके द्वारा किये गए शाेध आज होम्योपैथिक चिकित्सा में नये कीर्तिमान बन चुके हैं। वाइस चैयरमेन एंड्रियास जंग और एंजेलिका ने कहा कि क्रिटिकल मरीजों को भर्ती करने की डॉ प्रदीप के हॉस्पिटल में सुविधा है और मरीज ठीक भी होते हैं।
डॉ प्रदीप गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथिक चिकित्सा जगत में जर्मनी देश का बहुत विशेष योगदान है। इस देश से सम्मान प्राप्त करना अपने आप में गौरवांवित कर रहा है और चिकित्सा सेवा की प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने कहा कि नेमिनाथ हॉस्पिटल में आधुनिक एवं विश्वस्तरीय तकनीकों से कैंसर का इलाज किया जाता है। इसमें सफलता का अनुपात सकारात्मक है। होम्योपैथिक तकनीक द्वारा कैंसर रोग के इलाज में एलोपैथी की अपेक्षा मरीज को कम शारीरिक परेशानी होती है।
इस अवसर पर जर्मन टीम ने हॉस्पिटल में मरीजों से भेंट कर उनका हालचाल जाना और उनके ठीक होने पर संतोष व्यक्त किया।