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श्रीमद्भागवत महापुराण कथा : अटूट भक्ति, वैराग्य और विनम्रता का संदेश देते हैं ध्रुव चरित्र, जड़ भरत और वामन अवतार : चैतन्य हरिचरत जी महाराज

Pragya News 24

Wed, Jun 10, 2026
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आगरा। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर प्राचीन सीताराम मंदिर, वजीरपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस श्रद्धालुओं ने ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र एवं भगवान वामन अवतार के दिव्य प्रसंगों का श्रवण किया। कथा व्यास भागवताचार्य पूज्य श्री चैतन्य हरिचरत जी महाराज ने अपने प्रवचनों में भक्ति, वैराग्य और विनम्रता के महत्व पर प्रकाश डाला।

ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि दृढ़ संकल्प और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। बालक ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित हुए बिना कठोर तपस्या कर भगवान की कृपा प्राप्त की। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची लगन, निष्ठा और भक्ति से मनुष्य सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सकता है।

जड़ भरत चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य को संसार में रहते हुए भी मोह और आसक्ति से बचना चाहिए। जड़ भरत का जीवन वैराग्य, आत्मज्ञान और ईश्वर चिंतन का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सांसारिक आकर्षण मनुष्य को उसके वास्तविक उद्देश्य से दूर कर देते हैं, इसलिए जीवन में संतुलन और आत्मचिंतन आवश्यक है।

वामन अवतार प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान का यह अवतार अहंकार के विनाश और धर्म की स्थापना का संदेश देता है। राजा बलि की दानशीलता और भगवान वामन की दिव्य लीला हमें विनम्रता, समर्पण और धर्म के प्रति निष्ठा की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने अहंकार का त्याग कर भगवान के चरणों में समर्पित हो जाता है, तभी उसके जीवन का वास्तविक कल्याण होता है।

कथा के दौरान मुख्य यजमान निरंजन लाल सारस्वत एवं आशा सारस्वत ने श्रद्धापूर्वक व्यास पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दैनिक यजमान शेखर गोयल एवं रेनू गोयल ने भी व्यासपीठ का पूजन किया।

इस अवसर पर मनीष अग्रवाल, सुजाता अग्रवाल, अंबा प्रसाद गर्ग, मनोज अग्रवाल, अरविंद गर्ग, विजय गर्ग, सूरज तिवारी, दीपक गुप्ता, मयंक मित्तल, हनी, आयुष, ममता उपाध्याय, वंदना, सुजाता, धर्मेंद्र बॉबी, विक्रम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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