ACE 2026 : बढ़ती उम्र में मातृत्व-पितृत्व की तैयारी, फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन की आधुनिक तकनीकों पर मंथन
Pragya News 24
Sun, Aug 9, 2026
आगरा। करियर, उच्च शिक्षा और बदलती जीवनशैली के चलते देर से विवाह एवं परिवार नियोजन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऐसे में युवाओं में भविष्य में संतान प्राप्ति की संभावनाओं को सुरक्षित रखने के लिए एग, स्पर्म और भ्रूण फ्रीजिंग जैसी फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। अब वैज्ञानिक भ्रूण को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के साथ उसकी गुणवत्ता और क्षमता को बेहतर बनाए रखने की संभावनाओं पर भी शोध कर रहे हैं।
मुगल शेरेटन में आयोजित एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट (ACE) की 14वीं इंटरनेशनल कांग्रेस—ACE 2026 के दूसरे दिन प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे आधुनिक बदलावों और नई तकनीकों पर विभिन्न वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने बांझपन के बढ़ते मामलों के कारणों के साथ-साथ फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन और उपचार की नवीन तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।
देर से परिवार नियोजन से बढ़ी एग-स्पर्म फ्रीजिंग की जरूरत
पत्रकारों से बातचीत में वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. जयदीप मल्होत्रा एवं डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा ने बताया कि बदलती जीवनशैली, करियर और उच्च शिक्षा को प्राथमिकता देने के कारण युवाओं में देर से विवाह तथा परिवार नियोजन की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसके चलते एग और स्पर्म फ्रीजिंग की ओर युवाओं का रुझान भी बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक उन महिलाओं और पुरुषों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो भविष्य में अपनी परिस्थितियों के अनुसार माता-पिता बनने की योजना बनाना चाहते हैं। इसके अलावा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार से पहले भी एग या स्पर्म को संरक्षित करना भविष्य में संतान प्राप्ति के विकल्प को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।
भ्रूण संरक्षण पर हो रहा आधुनिक शोध
विशेषज्ञों ने बताया कि भ्रूण फ्रीजिंग भी तेजी से विकसित हो रही फर्टिलिटी तकनीकों में शामिल है। वैज्ञानिक भ्रूण की गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखने तथा भविष्य में उसके सफल उपयोग की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार शोध कर रहे हैं। हार्मोनल समस्याओं, कुछ आनुवंशिक स्थितियों तथा अन्य चिकित्सीय कारणों में भी फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक मामले में व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और चिकित्सीय स्थिति के अनुसार उपचार एवं संरक्षण की रणनीति तय की जाती है।
25 से बढ़कर 35 वर्ष तक पहुंची संतान प्राप्ति की उम्र
ACE के इनकमिंग प्रेसिडेंट डॉ. गौरव मजूमदार ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा विवाह के बाद भी कुछ वर्षों तक करियर पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके चलते जहां पहले लगभग 25 वर्ष की उम्र में संतान प्राप्ति सामान्य मानी जाती थी, वहीं अब कई दंपतियों में यह उम्र बढ़कर 35 वर्ष तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि बांझपन के बढ़ते मामलों के पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ तंबाकू एवं नशीले पदार्थों का सेवन और बिगड़ती जीवनशैली भी महत्वपूर्ण कारक हैं। इसलिए केवल उपचार पर निर्भर रहने के बजाय युवाओं को अपनी जीवनशैली और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
आधुनिक तकनीक के साथ जागरूकता भी जरूरी
विशेषज्ञों ने कहा कि फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन तकनीकों ने उन लोगों के लिए नए विकल्प उपलब्ध कराए हैं, जिन्हें चिकित्सीय या व्यक्तिगत कारणों से परिवार नियोजन को आगे बढ़ाना पड़ता है। हालांकि, इन तकनीकों के बारे में सही जानकारी और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श बेहद महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर ACE अध्यक्ष डॉ. सुजाता रामकृष्णन, सचिव परुषराम गोपीनाथ, आयोजन सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा एवं ICMR मुंबई के डॉ. दीपक मोदी सहित देशभर से आए विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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