: प्रोफेसर गजेंद्र विक्रम सिंह को टीबी मरीजों पर शोध के लिए मिला प्रतिष्ठित डॉ. ओए शर्मा ओरेशन अवॉर्ड
Fri, Oct 25, 2024
पोस्ट टीबी लंग डिसीज के मरीजों को होने वाली परेशानियों एवं उपचार पर किया शोध
टीबी से बचाव ही सर्वोत्तम उपाय - डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह
आगरा । सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश क्षय रोग उन्मूलन स्टेट टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह को क्षय रोगियों के चिकित्सा में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के लिए ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएआई) द्वारा वर्ष 2024 का चिकित्सा के क्षेत्र में मिलने वाला अति प्रातिष्ठित डाॅ. ओ ए शर्मा ओरेशन अवॉर्ड प्रदान किया गया है।
डॉ. सिंह को यह सम्मान उन्हें जयपुर में क्षय और वक्ष रोगों पर 79वें राष्ट्रीय सम्मेलन, ‘‘नैटकॉन 2024’’ के दौरान दिया गया। आगरा तथा एसएन मेडिकल कॉलेज को गौरवान्वित करते हुए डॉ. सिंह ने टीबी की बीमारी ठीक होने के बाद भी मरीजों के जीवन में होने वाले दुष्प्रभावों पर किए गए अनुसंधानों को अपने व्याख्यान के शीर्षक ‘‘पोस्ट-ट्यूबरकुलोसिस लंग डिजीज: द अनफिनिश्ड बैटल अगेंस्ट टीबी’’ द्वारा देश के विभिन्न राज्यो से आये वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रमाणों के साथ बताया कि इलाज के पूर्ण होने के बाद भी लगभग 50 प्रतिशत क्षय रोगी जीवनपर्यंत रोग के कारण अंगों में होने वाली विकृतियों से पीड़ित रहते हैं। विश्व भर में इस समय लगभग 15 करोड़ लोग टीबी सर्वाइवर है अर्थात् क्षय रोग सही होने के बाद जीवित है। जिनमें से आधे से अधिक टीबी उपरांत होने वाली बीमारियों से जूझ रहे है। देश तथा विदेशों के क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रमों में केवल क्षय रोगियों के कीटाणु मुक्त होने पर ही उपचार केंद्रित रहता है लेकिन पोस्ट टीबी रोगों पर कोई ठोस दिशा निर्देश नहीं हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि इन रोगियों में मृत्यु होने की संभावना भी सामान्य लोगो की अपेक्षा तीन गुना अधिक होती है। अभी तक ऐसी कोई औषधि या तकनीक ज्ञात नहीं है जो क्षय रोग के बाद होने वाले दुष्प्रभावों को रोक सके, ऐसे में टीबी संक्रमण और रोग से बचाव ही सर्वोत्तम बचाव उपलब्ध है। डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि पल्मोनरी रिहेबिलिटेशन कार्यक्रम ऐसे रोगियों के उपचार का विश्वसनीय उपाय है जिसे एसएन के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में ऐसे रोगियों पर विभाग में किए शोध द्वारा भी देखा गया है।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा अपने गौरवशाली इतिहास के पथ पर अग्रसरित होते हुए देश एवं विदेश में चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर योगदान दे रहा है।
: श्वास रोगी डॉक्टर की सलाह पर सही से लें इन्हेलर
Thu, Oct 24, 2024
एसएन मेडिकल कॉलेज में रेस्पिरेटरी मेडिसिन के पीजी छात्रों के लिए आयोजित हुई प्रतियोगिता
प्रदेश के सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को छात्रों ने किया प्रतिभाग
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में नई सर्जीकल बिल्डिग के प्रथम तल पर स्थित एमआरयू ऑडिटोरियम में बुधवार को रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विद्यार्थियों के लिये एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा किया गया। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के 11 सरकारी एवं प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के कुल 37 पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ एसएन मेडिकज के प्रधानाचार्य डा. प्रशांत गुप्ता द्वारा किय गया। अपने प्रोत्साहन भाषण में प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुये, उन्होंने क्षय एवं श्वास रोगों के मरीजों के उपचार के लिये आधुनिक तरीकों के साथ पारम्परिक चिकित्सा विज्ञान के मूल मंत्रों को उपयोग करने हेतु छात्रों को प्रेरित किया। यह प्रतियोगिता नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिसियन्स (इण्डिया) के द्वारा आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की पल्मोनरी मेडिसिन की प्रतियोगिता है जो इस वर्ष नवम्बर, 2024 में कोयम्बटूर में आयोजित होनी है, की स्क्रीनिंग के लिये थी।
रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष एवं नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिसियन्स (इण्डिया) के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य डा. गजेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता के बाद प्रथम दो विजेताओं को राष्टीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का मौका मिलता है। डा. सिंह ने बताया कि इस वर्ष एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा को यह प्रतियोगिता आयोजित करने का पहली बार मौका मिला है, जिसमें प्रदेश में अब तक आयोजित प्रतियोगितायों में सार्वाधिक 37 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
आचार्य डा. सन्तोष कुमार द्वारा इस अवसर पर श्वास रोगियों द्वारा सही से इनहेलर लेने पर प्रकाश डाला गया। सह-आचार्य डा. वीएन सिंह द्वारा अस्थमा के बारे में वैज्ञानिक तथ्य प्रस्तुत किये गये। इस प्रतियोगिता में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के छात्र डा. अभिषेक शुक्ला तथा एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के रेस्पिरेटरी मेडिसिन की डा. दिव्या त्यागी ने क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता के सफल संचालन में विभाग के सीनियर रेजीडेंट डा. अरविन्द एवं डा. अर्पित ने विशेष योगदान दिया।
: आयोडीन नमक, गर्भवती और बच्चों के लिए वरदान
Mon, Oct 21, 2024
विश्व आयोडिन अल्पता विकार दिवस पर सीएचसी फतेहपुर सीकरी में हुई साप्ताहिक समीक्षा बैठक
एएनएम और आशा ने घर-घर जाकर गर्भवती और धात्री महिलाओं को आयोडिन नमक के बारे में दी जानकारी
आगरा। जिले में विश्व आयोडीन अल्पता विकार दिवस के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर सीकरी में ब्लॉक साप्ताहिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इसमें आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से संबंधित जागरूकता बढ़ाने की जानकारी दी गई।
21 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व आयोडिन अल्पता विकार दिवस पर आयोडीन के पर्याप्त उपयोग के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने और आयोडीन की कमी के परिणामों पर प्रकाश डालना उद्देश्य है। दिवस पर संडीगुड़ उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले कार्य क्षेत्र में एएनएम वैशाली तिवारी और आशा कार्यकर्ता क्षमारानी ने गृह भ्रमण करके गर्भवती और धात्री माताओं को आयोडीन युक्त नमक और आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों के बारे में जागरूक किया । एएनएम और आशा कार्यकर्ता ने भ्रमण गतिविधि के माध्यम से गर्भवती और धात्री माताओं को आयोडीन के महत्व और इसकी कमी से होने वाली समस्याओं के बारे में बताया। उन्हें आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी दी। साथ ही आयोडीन की कमी से होने वाले लाभ और हनिया के बारे में भी जानकारी दी के द्वारा गृह भ्रमण करके गर्भवती और धात्री को बताया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि आयोडीन नमक गर्भवती महिला और बच्चों के लिए वरदान है। आयोडीन की कमी से गर्भस्थ शिशु के विकास में समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि मानसिक और शारीरिक विकास में देरी, जन्म के समय कम वजन और गर्भपात का खतरा। आयोडीन युक्त नमक के सेवन से गर्भवती महिला और बच्चों में आयोडीन की कमी को दूर किया जा सकता है।
एसीएमओ आरसीएच/ अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि आयोडीन एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है जो मानव वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे मंदबुद्धि, मानसिक मंदता, बच्चों में संज्ञानात्मक विकास की गड़बड़ी और मस्तिष्क की क्षति, थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना, तंत्रिका-पेशी और स्तैमित्य, गर्भवती महिलाओं में समस्याएं, गर्भपात, नवज़ात शिशुओं का वज़न कम होना, शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होना आदि। उन्होंने बताया कि आयोडीन युक्त नमक का सेवन करने से इन हानियों को रोका जा सकता है। आयोडीन युक्त नमक का सेवन करने से हमारे शरीर में आयोडीन की कमी नहीं होती है और हम स्वस्थ रहते हैं।
इस मौके पर अधीक्षक पीयूष अग्रवाल, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एसएमओ डॉ. महिमा चतुर्वेदी, एचईओ पंकज जायसवाल, बीपीएम सतेंद्रपाल सिंह, डब्ल्यूएचओ के फील्ड मॉनिटर नरेश कुमार, एएनएम सहित आशा कार्यकर्ता मौजूद रही ।
आयोडीन युक्त नमक का सेवन न करने से हो सकती कई हानियां :
गर्भवती महिलाओं में:
गर्भपात का खतरा
नवज़ात शिशुओं का वज़न कम होना
शिशु का मृत पैदा होना
जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु
बच्चों में:
मानसिक मंदता
संज्ञानात्मक विकास की गड़बड़ी
मस्तिष्क की क्षति
शारीरिक विकास में देरी