: बेवजह लेने वाली एंटीबायोटिक मांसपेशियों और दिमाग को बना रहीं कमजोर - डॉ. प्रद्योत प्रकाश
Sat, Feb 10, 2024
इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की दो दिवसीय कार्यशाला में एंटीबायोटिक के दुरुपयोग पर हुई चर्चा, 300 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए
आगरा। एंटीबायोटिक का बेवजह किया जाने वाला प्रयोग न सिर्फ सूक्ष्मजीवों की प्रतिरोधकता बढ़ाकर उन्हें ताकतवर बना रहा है बल्कि आपकी मांसपेशियों व न्यूरोन्स को भी कमजोर कर रहा है। जिससे लोगों में काम करने की क्षमता व याद्दाश्त कमजोर हो जाती है। हालांकि ऐसे साइड इफेक्ट का प्रतिशत फिलहाल काफी कम है, लेकिन बात चिन्ताजनक है। यह बात बीएचयू माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. प्रद्योत प्राकश ने जेपी सभागार में एसएन मेडिकल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की दो दिवसीय कार्यशाला में एंटीबायोटिक के धड़ल्ले से हो रहे दुरुपयोग पर चिन्ता जाताते हुए कही।
डॉ. प्रद्योत प्रकाश ने कहा कि एंटीबायोटिक के बेवजह प्रयोग से न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि वायरल इनफेक्सन में भी लोग एंटी बायोटिक का प्रयोग करते हैं, ऐसे में आंतों की पाचन क्रिया में मददगार अच्छे बैक्टीरिया मर जाते हैं। ऐसे में डायरिया, मांसपेशियों का कमजोर होना जैसी समस्या बढ़ सकती है। कार्यशाला में क्लीनिकल व माइक्रोबायोलॉजीकल पैनल डिसकशन भी हुआ, जिसमें एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को रोकने पर चर्चा हुई। चर्चा में मुख्य रूप से डॉ. राकेश भाटिया, डॉ. डी हिमांशु रेड्डी, डॉ राजीव पुरी, डॉ. जूही सिंघल थी। संचालन डॉ. फातिमा खान व डॉ. अरिना ने किया। साइंटिफिक सेशन में 300 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए।
गंगा नदी को निर्मल रखने वाले वायरस करेंगे बैक्टीरिया का इलाज
पर्यावरण में हर बैक्टीरिया मारने के लिए एक वायरस (बैक्टीरियोफाज) होता है। गंगा नदी में ऐसे बैक्टीरियोफज की अधिकता के कारण ही उसका जल स्वच्छ और निर्मल रहता है। अब जबकि एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग के कारण बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधकता बढ़ रही है और दवाएं बेअसर हो रही है, ऐसे में बैक्टीरियोफाज जैसे वायरस से बैक्टीरिया को खत्म करने पर देश के विभिन्न बड़े संस्थानों में शोध चल रहा है। एम्स ऋषिकेष के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. बलराम ओमर ने बताया कि विभिन्न बैक्टीरियोफाज की कॉकटेल बनाकर किसी विशेष बैक्टीरिया से होने वाले जख्म पर लगाकर शोध किए जा रहे हैं। यानि आने वाले समय में बैक्टीरिया के इलाज वायरस (बैक्टीरियोफाज) से किया जाएगा।
प्राकृतिक फार्मेसी हैं भारतीय रसोईयां
बीएचयू के डॉ. प्रद्योत प्रकाश ने एंटीबायोटिक के दुरुपयोग पर नियंत्रण के बारे में बताते हुए कहा कि भारतीय रसोईयां प्राकृतिक फार्मेसी हैं। जहां हल्दी, जीरा, अजवाइन, सौंठ जैसे कई मसालों के माध्यम से सर्दी, जुकाम, बुखार जैसी मामूली समस्या को दूर किया जा सकता है। परन्तु हम प्राकृतिक फार्मेसी से दूर होते जा रहे हैं। आसानी से मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली एंटीबायोटिक का बेवजह प्रयोग बढ़ रहा है, जिससे सूक्ष्मजीवों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधकता बढ़ रही है और इलाज महंगा और कठिन होता जा रहा है। घरेलू मसालों में पॉलीफिनोल जैसे ओर्गेनिक कम्पाउंड होते हैं जो बैक्टीरिया को चिपकने से रोकते हैं, यानि सब्जी दाल में पड़ने वाले मसाले प्रारम्भिक स्तर पर हमें संक्रमित होने से रोक देते हैं।
वॉकथॉन में घरेलू बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण को किया जागरूक
कार्यशाला के तहत वॉकथान का आयोजन किया। जिसका उद्देश्य घरेलू बायोमेडिकल वेस्ट के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करना था। वॉकथान का शुभारम्भ एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. प्रशान्त गुप्ता ने झंडी दिखाकर किया। कहा कि गलत तरीके से एक सीरिंज, कॉटन का निस्तारण भी बहुत घातक हो सकते है। इसलिए घर में इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का भी सही तरीके से निस्तारण बहुत आवश्यक है। खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार से प्रारम्भ होकर वॉकथॉन शहीद स्मारक पर पहुंची, जिसमें एसएन मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों सहित उप्र प्रदूषण बोर्ड के विश्वनाथ भी मौजूद थे। अतिथियों का स्वागत आयोजन सचिव डॉ. अंकुर गोयल व डॉ. विकास गुप्ता ने किया। डॉ. आरती के नेतृत्व में वॉकथॉन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल, सचिव डॉ. अंकुर गोयल, सहसचिव डॉ. विकास कुमार, डॉ. आरती अग्रवाल, डॉ. प्रज्ञा शाक्य, डॉ. सपना गोयल, डॉ. पारुल गर्ग, डॉ. श्वेता सिंघल आदि मौजूद थीं।
समापन समारोह में विजेता प्रतिभागियों को किया गया पुरस्कृत
आगरा। समापन समारोह में आयोजन समिति के सचिव अंकुर गोयल ने सभी सदस्यों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर कार्यशाला की सफलता के लिए बधाई दी गई। कहा कि पहली बार है जब इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की कार्यशाला में 300 से अधिक प्रतिनिधियों का संख्या पहुंची है। इस अवसर पर इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की उप्र व उत्तराखंड की अध्यक्ष डॉ. शम्पा व डॉ. विनीता मित्तल ने रिसर्च पेपर, पोस्टर व क्विज में विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र व स्मजति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। जिसमें मुख्य रूप से आकांक्षा गुप्ता, डॉ. रिचा कुमारी, डॉ. संगीता सिंह, डॉ. प्रियाल आनन्द, डॉ. निधि शर्मा, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. शिव वर्मा, डॉ. तान्या सचान, डॉ. अमित कुमार राय, डॉ. निखिर गुप्ता, डॉ. काशीनाथ पंडित, डॉ. लीसा माइनो, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. विक्रम प्रताप सिंह, डॉ. विदुषी सिंह, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. आकांक्षा पांडे को पुरस्कृत किया गया। डॉ. विकास गुप्ता ने सभी प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल, सचिव डॉ. अंकुर गोयल, सहसचिव डॉ. विकास कुमार, डॉ. आरती अग्रवाल, डॉ. प्रज्ञा शाक्य, डॉ. सपना गोयल, डॉ. पारुल गर्ग, डॉ. श्वेता सिंघल आदि मौजूद थीं।
: बीमारियों से मृत्यु का 48 फीसदी कारण सूक्ष्मजीवों का संक्रमण - डॉ कटोच
Fri, Feb 9, 2024
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इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, देश में माइक्रोबायोलॉजिस्ट की कमी दूर करने पर जोर
आगरा। भारत में बीमारियों से होने वाली मृत्यु में 48 फीसदी कारण सूक्ष्म जीवों से होने वाला संक्रमण है। इस पर नियंत्रण के लिए मेडिकल माइक्रोबायोलॉजीकल मोल्यीक्यूलर सुविधाओं का बेहतर नेटवर्क की जरूरत है। जिससे संक्रमण की समस्या को प्रारम्भिक अवस्था में जाना जा सके। देश में माइक्रोबयोलॉजिस्ट की काफी कमी है, जिसे दूर किया जाना चाहिए। देश की कुल जनसंख्या की 18 फीसदी आबादी उप्र में है। इसलिए उप्र में इनफेक्शन से होने वाली बीमारियों पर विशेष ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। आईसीएमआर के पूर्व डीजी डॉ. बीएम कटोच ने यह बात एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही।
डॉ. बीएम कटोच ने कहा कि जरूरत ग्रामीण क्षेत्रों तक सामान्य चिकित्सकीय सुविधाओं के साथ माइक्रोऑर्गेनिज्म की जांच की सुविधाओं व माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट की कमी को पूरा करने की है। जिससे इनफेक्शन होने पर लोगों को सही समय पर सही जांच होने से सही इलाज मिल सके। भारत सरकार के 2024 तक देश को टीबी मुक्त बनाने की योजना के बारे में कहा कि बहुत तेजी से और अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। सफलता तो मिलेगी लेकिन कितनी, इसके नतीजे तो 2025 में पता चल पाएंगे। एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता ने कहा कि किसी भी बीमारी में इलाज शुरु करने का आधार माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट हैं।
कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. वीएम कटोच, विवि की कुलपति आशु रानी, एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. प्रशांत गुप्ता, इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट प्रो. भारती मल्होत्रा, एसएन माइक्रोबयोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल, डॉ. शम्पा, डॉ. विनीता मित्तल ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संचालन डॉ. विकास गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. अमिता जैन, डॉ. केएन प्रसाद, डॉ. मलिनी कपूर, डॉ. रंगमी, डॉ. मुनीष गुप्ता, डॉ. अतुल गर्ग आदि उपस्थित थे।
डॉ. बीएम अग्रवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट प्रदान किया
एसएन मेडिकल कालेज माइक्रोबॉयोलजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल को स्मृति चिन्ह व शॉल उढ़ाकर लाइफ टाइम अचीवमेंट प्रदान किया गया। एसजीपीजीआई के डॉ. टीएन ढोल को मरणोपरान्त सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सोविनियर का भी विमोचन किया गया, जिसमें 300 रिसर्च पेपर पब्लिक किए गए हैं।
: उत्तर भारत में एच1एन1 स्वाइन फ्लू फैलने का खतराः डॉ. अतुल गर्ग
Fri, Feb 9, 2024
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फरवरी से अप्रैल और सितंबर से अक्टूबर तक आ सकते हैं केस, लखनऊ में छह केस मिले, नहीं है घातक
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दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, पहले दिन हुआ 6 वर्कशॉप का आयोजन
आगरा। इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में आज एसजीपीजीआइ, लखनऊ असिस्टेंट प्रोफेसर अतुल गर्ग ने बताया कि हर वर्ष वायरल संक्रमण को लेकर एडवाइजरी जारी की जाती है। इस बार फरवरी से लेकर मार्च तक और सितंबर से लेकर अक्टूबर तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण फैल सकता है। लखनऊ में छह केस मिल चुके हैं लेकिन यह घातक नहीं है, उन्होंने बताया कि हर बार स्वाइन फ्लू का स्ट्रेन बदल रहा है, 2022 में एच3एन2 का संक्रमण फैला था, इस बार वायरस में बदलाव हुआ है और 2009 में फैले एच1एन1 से स्वाइन फ्लू फैलने की आशंका है, इसे लेकर स्वाइन फ्लू की वैक्सीन में भी बदलाव किया गया है।
टेमी फ्लू हो रही कारगर साबित
स्वाइन फ्लू की घातकता कम हुई है, साथ ही टेमी फ्लू दवा इस पर कारगर साबित हो रही है। ऐसे में स्वाइन फ्लू का संक्रमण घातक नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, इसमें मोटापा, मधुमेह, कैंसर, एचआइवी के मरीज शामिल हैं उन्हें परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाएं व किसी भी ग तरह का ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों को भी ख्याल रखना होगा। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण खत्म हो जाएगा। इसकी दूसरी लहर अगस्त से सितम्बर के बीच आ सकती है।
सूक्ष्मजीवों की पहचान व जांच के लिए छह वर्कशॉप का आयोजन
कार्यशाला के तहत वैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे सूक्ष्मजीव व उनसे होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए एसएन मेडिकल कालेज में 6 वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में 450 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल, सचिव डॉ. अंकुर गोयल, सहसचिव डॉ. विकास कुमार, डॉ. आरती अग्रवाल, डॉ. प्रज्ञा शाक्य, डॉ. सपना गोयल, डॉ. पारुल गर्ग, डॉ. श्वेता सिंघल आदि मौजूद थीं।
10 फरवरी को बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जागरूकता के लिए निकलेगी वॉकथॉन
कार्यशाला के तहत 10 फरवरी को खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार से शहीद स्मारक तक वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। जिसका उद्देश्य अस्पताल व नर्सिंग होम के अलावा घरेलू इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण करने के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करना होगा। वॉकथॉन में एसएन मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों, डॉक्टर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों सहित सैकड़ों लोग शामिल होंगे। जेपी सभागार में ही सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक साइंटिफिक सेशन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग व उसके कारण माइक्रोऑरगेनिज्म में दवाओं के प्रति पैदा होने वाली प्रतिरोधकता जैसे गम्भीर विषयों पर डॉक्टरों के साथ पैनल डिसकशन में चर्चा होगी। 300 से अधिक रिसर्च पेपर व पोस्टर का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।