गीता ओलम्पियाड : बचपन से बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण, गीता से जीवन-दर्शन समझाने की पहल
Pragya News 24
Sat, Oct 3, 2026
आगरा। गीता केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में सही दृष्टिकोण और कर्तव्य का मार्गदर्शन देने वाली शिक्षाओं का स्रोत है। मोह, चिंता, असमंजस और कठिन परिस्थितियों में कर्तव्य को लेकर उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का समाधान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के माध्यम से समझाया। इन्हीं जीवन मूल्यों और शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस्कॉन द्वारा आगरा में गीता ओलम्पियाड की शुरुआत की गई है।
श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर में आयोजित गीता ओलम्पियाड के पुरस्कार वितरण समारोह के आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रम में इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष अरविंद स्वरूप प्रभु ने कहा कि गीता की शिक्षाएं केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामान्य जीवन में भी मनुष्य को सही दृष्टिकोण अपनाने और अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी भारतीय परंपराओं, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी रहे, इसके लिए इस्कॉन की ओर से शहर के विभिन्न स्कूलों में विद्यार्थियों को गीता सार पढ़ाया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों को नैतिक, सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 13 दिसंबर को सूरसदन में इंटरनेशनल गीता ओलम्पियाड का पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा। प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
गीता के संदेश से बच्चों को जोड़ना समय की जरूरत
समाजसेवी नितेश अग्रवाल और सेंट एंड्रयूज पब्लिक स्कूल के निदेशक गिरधर शर्मा ने कहा कि गीता मनुष्य को कर्म करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने के लिए समय रहते प्रयास जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी को मूल्यों और संस्कारों से जोड़ने के प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में सामाजिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। गीता ओलम्पियाड इसी दिशा में बच्चों और युवाओं को जागरूक करने का एक प्रयास है।
उन्होंने कहा कि टूटते परिवार, पारिवारिक कलह, तलाक, अकेलेपन और वृद्धों के सामने खड़ी सामाजिक चुनौतियों जैसी समस्याओं के समाधान में जीवन मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। गीता का कर्म और परिणाम के प्रति संतुलित दृष्टिकोण व्यक्ति को तनाव तथा असफलता के भय से निपटने में सहायता कर सकता है।
कार्यक्रम में आशू मित्तल, ओमप्रकाश अग्रवाल, राजेश उपाध्याय, रवि नारंग विश्वास, शाश्वत नन्दलाल, सुशील अग्रवाल, शशि सारस्वत, मनमोहिनी, अदिति गौरांगी, राजेश, सूरज, यश आदि मौजूद रहे।
चार वर्गों में होगी गीता ओलम्पियाड
इस वर्ष गीता ओलम्पियाड को चार वर्गों में आयोजित किया जाएगा—
प्रथम वर्ग: कक्षा 1 से 2
द्वितीय वर्ग: कक्षा 3 से 5
तृतीय वर्ग: कक्षा 6 से 8
चतुर्थ वर्ग: कक्षा 9 से 12
आयोजकों ने इस वर्ष आगरा के करीब 40 हजार विद्यार्थियों को गीता ओलम्पियाड से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
इस्कॉन की अदिति गौरांगी ने बताया कि शहर के करीब 100 छोटे-बड़े स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए गीता सार की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। मिशनरी स्कूलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि गीता सार की कक्षाओं के करीब एक सप्ताह बाद विद्यार्थियों की 50 अंकों की परीक्षा आयोजित की जाती है। परीक्षा के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाते हैं।
स्कूल में अनुमति न मिलने पर ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा
इस्कॉन मंदिर अध्यक्ष अरविंद प्रभु ने बताया कि जिन स्कूलों में गीता सार की कक्षाएं संचालित करने की अनुमति नहीं मिलती, वहां विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि बच्चे मात्र 40 रुपये में गीता ओलम्पियाड के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के लिए बारकोड अथवा दिए गए मोबाइल नंबरों 9927091147, 8958982047 और 9897646412 पर संपर्क किया जा सकता है।
आयोजकों के अनुसार, गीता ओलम्पियाड का उद्देश्य प्रतियोगिता तक सीमित न रहकर बच्चों को गीता के जीवन मूल्यों, भारतीय संस्कृति, संस्कार और कर्तव्यबोध से जोड़ना है।
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