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कर्म, संस्कार और सनातन चेतना ही भारत की आत्मा : संत शिरोमणि गुरु रविदास जन्मोत्सव एवं हिंदू सम्मेलन में गूंजा समरसता और हिंदुत्व का संदेश

Pragya News 24

Tue, Feb 3, 2026
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आगरा। विश्व हिंदू महासंघ, आगरा द्वारा संत शिरोमणि गुरु रविदास जन्मोत्सव समारोह एवं हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन आवास विकास कॉलोनी स्थित सेल्फी रेस्टोरेंट में श्रद्धा, गरिमा और वैचारिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संत रविदास जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

मुख्य वक्ता शरद परमार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संत रविदास जी ने कर्म की प्रधानता को सर्वोपरि माना, न कि जाति की। उन्होंने कहा कि भारत ने सैकड़ों वर्षों तक पराधीनता का दंश झेला, जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण समाज में व्याप्त जातिवाद रहा। संत रविदास जैसे महापुरुषों ने समाज को यह संदेश दिया कि मनुष्य की पहचान उसके कर्म, आचरण और संस्कार से होती है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि हिंदू समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी अपने बच्चों को घर से बाहर भेजें, उनके मस्तक पर तिलक अवश्य लगाएं, क्योंकि तिलक हमारी सनातन पहचान, संस्कार और आत्मविश्वास का प्रतीक है।

कार्यक्रम में सौरभ तिवारी ने संत रविदास जी की दार्शनिकता एवं व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि संत रविदास जी का चिंतन सामाजिक समरसता, समानता और भक्ति पर आधारित था, जो आज के समाज के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और वाणी से समाज को जोड़ने का कार्य किया।

महानगर अध्यक्ष किशन गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म मानवता, करुणा और समरसता का मार्ग दिखाता है। हिंदुत्व किसी से भेद नहीं करता, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है। संत रविदास जी का जीवन सनातन संस्कृति की इसी व्यापक सोच का उदाहरण है।

कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष मातृशक्ति गंगा धाकड़ ने भी अपने विचार रखे और कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभाव मजबूत होता है।

इस अवसर पर अंकित उपाध्याय, अश्वनी शर्मा, राजेश शर्मा, गजेंद्र शर्मा, शरद प्रजापति, देव ठाकुर, मीनू अग्रवाल, पूनम पचौरी, डिंपल गंभीर, राजीव गुप्ता, रोहित गर्ग, सौरभ अग्रवाल, राहुल गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन संत रविदास जी के आदर्शों को आत्मसात करने और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेकर किया गया।

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