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: कंस का अट्टहास, लाल आंखें और गर्जन से कांपा मथुरा नगरी का दृश्य

Pragya News 24

Mon, Oct 27, 2025
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  • श्रीकृष्ण लीला महोत्सव में “कंस की दुहाई सवारी” ने दिखाया अधर्म की पराकाष्ठा और धर्म की अनिवार्य विजय
  • मुख्य अतिथि भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने किया शुभारंभ, भव्य झांकियों में जीवंत हुए द्वापर युग के प्रसंग, जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजा आगरा

आगरा। लाल आंखों में दहकती क्रूरता, चेहरे पर अहंकार की रेखाएँ और अधर्म की गर्जना, जब “कंस” का अट्टहास हवा में गूंजा तो श्रद्धालुओं की रूह कांप उठी। 102 वर्षों से आस्था की परंपरा को जीवित रखने वाला श्रीकृष्ण लीला महोत्सव रविवार को अपने चरम भक्ति स्वरूप में तब्दील हो गया जब ऐतिहासिक “कंस की दुहाई सवारी” गौशाला प्रांगण, बल्केश्वर रोड से नगर भ्रमण पर निकली। इस भव्य आयोजन में द्वापर युग के दारुण क्षणों को सजीव झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसने भक्तों को अत्याचार के उस दौर और धर्म की विजय की अनिवार्यता का साक्षी बना दिया।

मुख्य अतिथि भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कंस की दुहाई सवारी हमें यह संदेश देती है कि अन्याय, अत्याचार और घमंड कितना भी प्रबल क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। श्रीकृष्ण लीला महोत्सव हमारी संस्कृति की धड़कन है, जो हर वर्ष भक्तों के मन में नव ऊर्जा भरता है।
श्री कृष्ण लीला महोत्सव समिति अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि कंस की दुहाई सवारी केवल एक झांकी नहीं, बल्कि धर्म की अनिवार्य विजय का प्रतीक है। आगरा का यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आत्मा में बस चुकी आस्था का पर्व है, जो समाज में भक्ति और संस्कृति की ज्योति प्रज्वलित करता है।

झांकियों ने जीवंत किया अत्याचार का युग
“कंस की दुहाई सवारी” में मंचित झांकियों ने अधर्म के चरम स्वरूप को भव्यता के साथ प्रस्तुत किया। मुख्य आकर्षण रही कंस दरबार झांकी, जिसमें सिंहासन पर बैठा कंस लाल आंखों से प्रज्वलित क्रोध बरसा रहा था, अपने मंत्रियों के साथ अत्याचार और सत्ता का प्रदर्शन कर रहा था। इसके अतिरिक्त झांकियों में पूतना, अघासुर और बकासुर वध, कंस द्वारा अपने पिता महाराज अग्रसेन को कारागार में डालना, तथा कंस का स्वयं को राजा घोषित करना जैसे प्रसंगों ने द्वापर युग को सजीव कर दिया। कलाकारों की दमदार संवाद अदायगी, पारंपरिक संगीत और “कंस की दुहाई” के उद्घोषों से वातावरण धर्म–अधर्म के संघर्ष का जीवंत प्रतीक बन गया।

पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत, भक्तिमय हुआ नगर
सवारी गौशाला प्रांगण से आरंभ होकर जीवनी मंडी, भैरव बाजार, बेलनगंज, कचहरी घाट, छत्ता बाजार, रावतपाड़ा, सुभाष बाजार, जौहरी बाजार, किनारी बाजार, फुलट्टी, घटिया, सिटी स्टेशन, धूलियागंज मार्ग से होती हुई पुनः गौशाला प्रांगण पहुंची। पूरा मार्ग जय श्रीकृष्ण के उद्घोषों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने घरों, मंदिरों और बाजारों से पुष्पवर्षा कर झांकियों का स्वागत किया।

ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में संरक्षक डॉ. विजय किशोर बंसल, विजय रोहतगी, शेखर गोयल, पी. के. मोदी, संजय चेेली, प्रभात रोहतगी, कैलाश खन्ना, के. के. अग्रवाल, अनंत उपाध्याय, मुकेश शर्मा, मनोज बंसल, गिर्राज बंसल, विष्णु अग्रवाल, आयुष बंसल, संजय गर्ग, राजेन्द्र अग्रवाल, लक्ष्मण, मुरारी लाल पेंट, पंकज मोहन, विनी सिंघल, अनुप गोयल, आशीष रोहतगी आदि उपस्थित रहे।

आगे के आयोजन
अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि सोमवार, 27 अक्टूबर को देवकी-वसुदेव विवाह, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और मयूर नृत्य का भव्य आयोजन होगा, जबकि मंगलवार को नंदोत्सव, पूतना उद्धार लीला और डांडिया नृत्य संध्या का विशेष कार्यक्रम रखा गया है। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण लीला महोत्सव के अंतर्गत समाज सेवा की दिशा में नवीन पहल करते हुए 29 अक्टूबर को विशाल रक्तदान शिविर लीला स्थल पर ही लगाया जाएगा।

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