: 1 अक्टूबर से शुरू होगा गुरुद्वारा गुरु का ताल का 36वाँ सालाना गुरमत समागम
Sat, Sep 30, 2023
आगरा। गुरुद्वारा गुरु का ताल में 1 अक्टूबर से 3 अक्टूबर तक विशाल गुरमत समागम शुरू होने जा रहा है।गुरुद्वारा गुरु का ताल की सबसे पहले सेवा संभालने वाले और पाठ, शबद कीर्तन के माध्यम से इस स्थान को ऊंचाइयां देने वाले संत बाबा साधू सिंह मोनी जी और संत बाबा निरंजन सिंह जी की याद में यह समागम पिछले 35 वर्षों से निरंतर भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है।
शनिवार को गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीटिंग हॉल में इस गुरमत समागम की पत्रिका का विमोचन गुरुद्वारा गुरु का ताल के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने किया। इस पत्रिका में संपूर्ण समागम की जानकारी के साथ-साथ गुरुद्वारा गुरु का ताल व संत बाबा साधू सिंह जी मोनी जी और संत बाबा निरंजन सिंह जी का संक्षिप्त इतिहास व इस गुरुद्वारे को भव्यता देने में किए गए योगदान का उल्लेख किया गया है।
मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि इस गुरमत समागम में देशभर से अनेक रागी जत्थे, धर्म प्रचारक, कथावाचक विभिन्न गुरुद्वारों सिख संस्थाओं के मुखी, प्रधान, जत्थेदार के साथ-साथ अनेक डाढ़ी जत्थे और कविजन आ रहे हैं। जो अपनी वाणी से संगत को गुरु जस सुना कर निहाल करेंगे।
बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि 1 अक्टूबर रात्रि से यह समागम शुरू होगा और 2 अक्टूबर को सुबह से रात्रि तक चलेगा। 3 अक्टूबर को दोपहर इस समागम का समापन होगा। समागम में आने वाली संगत के लिए रुकने की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। समागम में केवल आगरा ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के साथ-साथ पीलीभीत, शाहजहांपुर, सितारगंज व पंजाब की भी विभिन्न हिस्सों से विशेष संगत प्रतिवर्ष यहां पहुंचती है।
यह होगी गुरमत समागम की रूपरेखा
गुरमत समागम 1 अक्टूबर की शाम 7:00 बजे से शुरू होगा। शाम से लेकर देर रात्रि तक यहां कवि दरबार का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सिख इतिहास व साहित्य से जुड़े वरिष्ठ कविजन अपनी रचनाओं से संगत को सिख इतिहास व गुरु साहिबान व उनके पारिवारिक जनों की संघर्ष गाथाओं को कविता के माध्यम से सुनाएंगे। मुख्य दीवान 2 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चलेगा। तीसरा दीवान 2 अक्टूबर को शाम 6:00 बजे से रात्रि 12:00 तक चलेगा जबकि अंतिम दीवान 3 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चलेगा। जिसके साथ ही समागम का समापन हो जाएगा।
यह संभालेंगे व्यवस्थाएं
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि इस भव्य आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए आगरा की संगत के साथ-साथ ढाई सौ से अधिक सेवादारों की टीम अपना योगदान देती है। यह सभी सेवादार मुख्य रूप से शाहजहांपुर, पीलीभीत व उत्तराखंड के सितारगंज से प्रतिवर्ष आते हैं।माथा टेकने के दौरान भीड़ की व्यवस्था को संभालने के साथ-साथ पार्किंग की व्यवस्थाएं, सुरक्षा व्यवस्थाएं व लंगर की व्यवस्था मुख्य रूप से यह सभी सेवादार संभालते हैं। साथ ही आने-जाने व रुकने वाली संगत की व्यवस्थाएं के साथ-साथ 24 घंटे चलने वाले चाय के लंगर की व्यवस्था भी यह सेवादार पूरी श्रद्धा के साथ प्रतिवर्ष करते हैं।
अरदास के साथ शुरू हुई भट्टी
तीन दिन तक चलने वाले इस समागम में लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। हर समय हजारों श्रद्धालुओं की यहां मौजूदगी रहती है जिनके लिए लंगर आदि का प्रबंध गुरुद्वारा की ओर से पूरे आदर सत्कार व श्रद्धा के साथ किया जाता है। इस भव्य आयोजन में आने वाली संगत के लिए चाय नाश्ते व मिष्ठान की सेवा के लिए हलवाई लगा दिए गए हैं। अरदास के बाद सभी भट्टीयां शुरू कर दी गई है जिसमें चाय के साथ दिए जाने वाले नाश्ते मिष्ठान आदि का बनना शुरू हो गया है ।
उन्होंने बताया कि प्रतिदिन दिन में तीन से चार बार लंगर तैयार किया जाता है। जो यहां आने वाली संगत को पूरे प्रेम के साथ ग्रहण कराया जाता है। लंगर में आने वाली भीड़ को किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए एक विशेष टीम 24 घंटे यहां सेवाओं में जुटी रहती है।
यहां होगी पार्किंग व्यवस्थाएं
समागम में हिस्सा लेने के लिए आ रहे श्रद्धालुओं के साथ-साथ उनके वाहनों के रुकने के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई है। बस व ट्रक के साथ-साथ कार व दुपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग स्थान पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
यह रहे मौजूद
पत्रिका विमोचन के दौरान संत बाबा प्रीतम सिंह के साथ-साथ श्री गुरु सिंह सभा माईथान के प्रधान कमलदीप सिंह, सुखमनी सेवा सभा के वीर महेंद्र पाल सिंह, चढ़दीकला सिख सेवक सोसाइटी के दलजीत सिंह सेतिया, उपेंद्र सिंह लवली ,राजू सलूजा नरेंद्र सिंह खनूजा, पाली सेठी, शेर सिंह, रामगढ़िया एसोसिएशन के प्रधान बलजिंदर सिंह व गुरुद्वारे के मुख्य सेवादार मौजूद रहे।
: गायत्री शक्तिपीठ पर निःशुल्क किया गया पितरों का तर्पण
Fri, Sep 29, 2023
झांसी।
गायत्री शक्तिपीठ आंतिया तालाब पर प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी श्रृद्धालुओं को पितरों का श्राद्ध तर्पण कर्म करने की निःशुल्क व्यवस्था की गयी। जिसमें झांसी के लगभग 200 परिजनों ने भाग लिया। तर्पण करने में महिलाओं की भी भागीदारी रही।
तर्पण का कार्यक्रम प्रतिदिन 05.30 बजे से शक्तिपीठ पर सम्पन्न कराया जायेगा। तर्पण हरिकृष्ण पुरोहित एवं अजय शर्मा के द्वारा कराया जायेगा।
कार्यक्रम में सूर्या कुशवाहा, आदित्य श्रीवास्तव, दयाराम कुशवाहा आदि ने सहयोग किया।
: उदयनिधि और स्वामी प्रसाद मौर्य को इन महाराज ने कह दिया 'मूर्ख'
Fri, Sep 29, 2023
आगरा। हाथों में दीपक और आंखों में अश्रुधारा। 14 वर्ष बाद वनवास से लौटे सियाराम के चरणों में हर भक्त नतमस्तक था। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वशिष्ठ मुनि के रूप में मौजूद ददरौआ धाम के महामण्डलेश्वर स्वामी रामदास महाराज ने श्रीराम के स्वरूप के राज तिलक किया तो पुष्पों की वर्षा से कथा स्थल भक्ति की सुगन्ध से महक उठा। जय सीयाराम के साथ बजरंग बली के उद्घोष से पण्डाल गूंज उठा। कथा वाचक स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने सभी भक्तों को श्रीराम के राजतिलक की बधाईयां देते हुए घर-घर में राम राज्य लाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि ईर्ष्या और द्वेष को त्यागों प्रेम से रहना सीखो तो घर-घर में राम राज्य जाएगा।
उदयनिधि और स्वामी प्रसाद मौर्य को कहा मूर्ख
स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने मंच से स्पष्ट शब्दों में मूर्ख स्वामी प्रसाद मौर्य व उदयनिधि उच्चारण के साथ कहा कि जिसने सनातन को छेड़ा उसका अस्तित्व खत्म हो गया। श्रीराम चरित मानस ही वह ग्रंथ है जो जीवन में संतुलन और रिश्तों को निभाने की सीख देता है। ग्रंथ को पढ़े बिना सिर्फ विरोध करने के लिए कुछ भी अनाप शनाप बोलना मूर्खता की निशानी है। कहा काम, क्रोध, मोह, लोभ, मद, मत्स यह छह ऐसे राक्षस हैं, जिन्हें मारने के लिए किसी शस्त्र की नहीं बल्कि शास्त्र की जरूरत पड़ती है।
श्री कामतानाथ सेवा समिति द्वारा चित्रकूट धाम (कोठी मीना बाजार) में आयोजित श्रीराम कथा में कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने श्रीराम के राजतिलक के साथ कथा को विश्राम दिया। श्रीराम के राजतिलक के बाद उर्मिला, माण्डवी व सुकीर्ति को श्रीराम द्वारा अख्म्ड सौभाग्यवती का आर्शीवाद देने का प्रसंग सुनाते हुए रामस्वरूपाचार्य महाराज की भी आंखें भर आयी। कहा कि भरत और माता कैकयी के आने के उपरान्त ही श्रीराम ने राजतिलक की औपचारिकताओं को स्वीकार किया।
संवैधानिक रुप से राम राज्य कब आएगा यह तो भविष्य बताएगा लेकिन घर-घर में राम राज्य के लिये सरकार ने किसी को नहीं रोका है। आज हर घर में भाईयों में सम्पत्ति का विवाद है। भक्ति से जीवन में भगवान और सम्पत्ति से व्यवधान मिलते हैं। भरत श्रीराम के वन जाने पर अयोध्या से 14 किमी दूर नंदीग्राम में रहे। कभी श्रंगार नहीं किया। अयोध्या के पकवान और सम्पत्ति सब का त्याग कर दिया। श्रीराम और भरत जैसे युवा, सीता, उर्मिला, माण्डवी जैसी बहुएं और माताएं कौशल्या बन जाए तो अवश्य घर-घर में राम राज्य होगा।
जीवन में भय नहीं भाव पैदा करिए…
स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने अरण्य काण्ड में जटायू और सुग्रीव का उदाहरम देते हुए कहा कि मन में भाव को पैदा करें, भय को नहीं। सुग्रीव भय के कारण जो काम नहीं कर पाया वह भाव से परिपूर्ण होने के कारण जटायू ने कर दिया। सीता हरण के दौरान उसने अपनी चोंच के प्रहार से रावण को मूर्छित कर दिया था। मन से भय को भगाना है तो प्रतिदिन हनुमान चालीसा को पाठ करें। प्रतिदिन पांच मिनट की कीमत में भय को दूर करने का इससे बेहतर उपाय नहीं मिलेगा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से साध्वी अमृतानंदमयी मानस समीक्षा प्रयागराज जयप्रकाश त्यागी, हकीम सिंह त्यागी, अध्यक्ष जय भोले, लवकेश चौधरी, पिंकी त्यागी, श्रीकांत त्यागी, प्रीति उपाध्याय, अलौकिक उपाध्याय, शैलेंद्र उपाध्याय, वात्सल उपाध्याय, सौरव शर्मा, अमित, सागर राणा, राकेश मंगल, दीनदयाल मित्तल, रामवीर चाहर, विमल आदि उपस्थित रहे।