: मां चामुण्डा देवी का वार्षिक मेला 12 अप्रैल को, 9 को मंगल कलश यात्रा
Mon, Apr 7, 2025
प्राचीन मंदिर मां चामुण्डा देवी मंदिर में भक्ति भाव से आयोजित किया जाएगा वार्षिक मेला
9 को कलश यात्रा, 12 को फूल बंगला देवी जागरण और 14 अप्रैल को होगा भण्डारा
आगरा। प्राचीन मंदिर मां चामुण्डा देवी ( राजामंडी स्टेशन के निकट) वार्षिक मेला भक्ति भाव के साथ आयोजित किया जाएगा। 9 अप्रैल को मंगल कलश यात्रा के साथ वार्षिक मेला का शुभारम्भ होगा। 12 अप्रैल को भव्य फूल बंगला व देवी जागरण और 14 अप्रैल को भण्डारे का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी प्रबंध एवं सेवा समिति के पदाधिकारियों ने मंदिर परिसर में आयोजित आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रमम में देते हुए श्रद्धालुओं को मेले में आने का आमंत्रण दिया। इस अवसर पर मां दुर्गा के खूब जयकारे गूंजे।
अध्यक्ष चौधरी दरब सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 9 अप्रैल को सर्वप्रथन विधि विधान से पूजन के साथ कलश स्थापना के साथ वार्षिक मेले का शुभारम्भ होगा। उसके उपरान्त कलश यात्रा निकलेगी, जिसमें 3 हजार से अधिक महिलाएं सिर पर मंगल कलश लेकर बैंड बाजों के साथ श्रद्धा भाव में नाचती गाती चलेंगी। सचिव विपिन चौधरी, कोषाध्यक्ष विजय दत्त शर्मा, पार्षद विक्रांत सिंह कुशवाह, वीरेन्द्रानन्द ब्रह्मचारी ने बताया कि कलश यात्रा शाम 4 बजे मंदिर से प्रारम्भ होकर, न्यू राजामण्डी, तोता का ताल, लोहामण्डी चौराहा, बल्देवगंज, लोहामण्डी बाजार, राजामण्डी रेलवे फाटक से बाजार होते हुए, सेंट जॉन्स चौराहा, किदवई पार्क से पुनः मंदिर पहुंचकर विश्राम लेगी। 12 अप्रैल को माता रानी का अलौकिक श्रंगार व फूल बंगला के साथ 84 भोग लगाए जाएंगे। रात को देवी जागरण होगा। 14 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से भण्डारे में हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
इस अवसर पर मुख्य महन्त सुरेन्द्र गिरि संजय, लाला, सोनू अशोक, सुशील, दिलीप कुमार, श्यामू आदि उपस्थित थे।
: ज़ब तक रहेगी हिंदी कमजोर, तब तक रहेगी पहचान अधूरी…. डॉ. जे. एन. टंडन
Mon, Apr 7, 2025
आगरा। आज़ादी के सिपाही, मार्क्सवादी विचारक, भारतीय संस्कृति के हामी, पीड़ित, शोषित, मजदूर, किसानो के हिमायती, सांप्रदायिक ताकतो के घोर विरोधी, हर दिल अज़ीज़ का. महादेव नारायण टंडन की 22 वीं पुण्यतिथि पर माथुर वैश्य सभागार, पचकुइयां पर परम्परागत रूप से आयोजित व्याख्यान क्रम मे इस बार ‘हमारी हिंदी के अवसर और संकट’ विषयक व्याख्यान की शुरुआत वरिष्ठ शिक्षाविद एवं कवियत्री कार्यक्रम अध्य्क्ष डॉ. कुसुम चतुर्वेदी, अतिथि वक्ता प्रो. अभेय कुमार दुबे, डॉ. देव स्वरुप, का. पूरन सिंह. भावना जितेंद्र रघुवंशी द्वारा कामरेड टंडन के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प्पांजलि कर हुई।
जयपुर से पधारे बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. देव स्वरुप ने कामरेड टंडन के अविस्मरणीय एवं अतुलनीय व्यक्तित्व एवं किरदार को याद करके भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित जन के स्वागत सहित विषय प्रवतन् करते हुए का. डॉ. जे. एन. टंडन ने कहा, आज हिंदी का संकट यही है कि हिंदी भाषी नई रागात्मक निष्ठा के सांस्कृतिक स्तर पर भाषा से कटा हुआ है। हमे हिंदी को सिर्फ बोलने की नहीं अपनाने की ज़रूरत हैं। अगर हमे हिंदी पर गर्व नहीं, तो हमे अपनी जड़ों से जुड़ने का हक़ भी नहीं हैं। जब तक हिंदी कमजोर है, तब तक पहचान अधूरी है।
अतिथि वक्ता प्रख्यात मीडिया विश्लेषक प्रो. अभय कुमार दुबे ने अपने व्याख्यान में कहा शुरुआत से ही हिंदी का संघर्ष तितरफ़ा था। पहली समस्या यह थी कि उसे एक बेहद बहुभाषी देश में युरोपीय शैली की राष्ट्रभाषा को थोपे बिना भारतीय संघ की राजभाषा बनना था। दूसरी समस्या यह थी कि इस प्रक्रिया में महज़ सरकारी कामकाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली राजभाषा और सभी के लिए अनिवार्य राजभाषा के बीच घालमेल कैसे रोका जाए। तीसरी और सबसे बड़ी समस्या यह थी कि राजभाषा के रूप में हिदीं को अन्य भाषाओं पर आरोपित किये बिना राष्ट्रीय एकता के सर्वमान्य उपकरण में कैसे बदला जाए।
कुल मिला कर भारतीय संघ की राजभाषा को इस बहुभाषी देश की सर्वस्वीकृत सम्पर्क भाषा बनने-बनाने का संघर्ष ही हिंदी का सबसे बड़ा संघर्ष है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए हिंदी के पास सभी गुण हैं, लेकिन इस सर्वलक्षणा हिंदी के रास्ते में अंग्रेज़ों द्वारा चलाई गई भाषाई राजनीति सबसे बड़ी रुकावट है।
आज के हिंदी-विरोधी आंदोलन उसी इतिहास से निकले हैं। हिंदी एक डबल-सेक्टर लेंग्वेज है। उसका एक सरकारी सेक्टर है और एक सामाजिक सेक्टर, लेकिन दोनों एक-दूसरे को बहुत कम मज़बूत करते हैं। सामाजिक क्षेत्र अवसरों को पैदा करता है और सरकारी क्षेत्र अवसरों को नष्ट करता है।
अतिथि वक्ता प्रो. अभेय कुमार दुबे को डॉ. स्मिता टंडन, द्वारा स्मृति भेट दी गई। आभार कामरेड पूरन सिंह ने दिया। संचालन हरीश चिमटी ने किया। पूर्व मंत्री चो. उदय भान सिंह, रामनाथ गौतम, ज्योत्सना रघुवंशी, दिलीप रघुवंशी, डॉ. वी आर सेंगर, डॉ. राकेश भाटिया, डॉ. अजय कालरा, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ अनुपमा शर्मा, डॉ. अनुपम गुप्ता, शरीफ उस्मानी, शिवराज यादव, डॉ संजय कुलश्रेष्ठ, डॉ एस एस सूरी, डॉ अनूप दीक्षित, डॉ रजनीश त्यागी, डॉ जय बाबू, डॉ विजय कत्याल, डॉ मुकेश भारद्वाज, राम नाथ शर्मा, रमेश पंडित, डॉ. रजनीश गुप्ता, डॉ. मधुरिमा शर्मा, नीरज मिश्रा, डॉ. मुनिशवर गुप्ता आदि बड़ी संख्या मे विशिष्ट जन उपस्थित थे।
: ढोल नगाड़ों संग आकर्षक झांकियों के साथ निकली देवी शशिबाला की शोभायात्रा
Mon, Apr 7, 2025
पुष्प वर्षा व चुनरी पहनाकर जगह-जगह हुआ स्वागत
शोभायात्रा देखने को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
दिन में भण्डारा और रात्रि में हुआ देवी जागरण
आगरा। ढोल-ताशों पर देवी मां के भक्तियम संगीत पर झूमते गाते श्रद्धालु और मन में श्रद्धा भाव को बढ़ाती देवी देवताओं की आकर्षक झांकियां। माता के दर्शन और आशीर्वाद को ललायित सैकड़ों भक्तजन। भक्तिमय उत्साह व उमंग के साथ श्री शक्ति भजन मण्डल द्वारा नवरात्रि के उपलक्ष्य में देवी शशिबाला जी की शोभायात्रा का शुभारम्भ भक्तजनों संग देवी मां की आरती कर किया।
संगीता सिनेमा चौराहे से प्रारम्भ शोभायात्रा में बैंड बाजों और ढोल नगाड़ों संग सर्वप्रथम विघ्नविनाशक गणपति की झांकी थी। रामलला, राम दरबार, कालिया नाग का मंथन करते श्रीकृष्ण, राधा-कृष्ण, शिव पार्वती, लक्ष्मी नारायण, बजरंग बली सहित देवी देवताओं की 21 आकर्षक झांकियों के संग शोभायात्रा का जगह-जगह आरती कर, देवी मां की प्रतिमा को चुनरी पहनाकर व पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। अंत में देवी शशि बाला की झांकी थीं। भक्तजनों को प्रसाद वितरण किया गया।
भोगीपुरा, रुई की मंडी, शाहगंज चौराहा, नौबस्ता चौराहा, लोहामंडी बाजार, राजामंडी बाजार, एमजी रोड, नालबंद चौराहा, पंचकुईयां चौराहा से होते हुए चिल्लीपाड़ा शाहगंज पहुंची, जहां शोभायात्रा का समापन हुआ। इसके उपरान्त श्रद्दालुओं द्वारा भक्तिभाव से मंदिर में ज्योति प्रचंड (जगराता) व भगवती का गुणगान (कीर्तन) किया गया। प्रातः काल मंदिर में हवन, कन्या पूजन के उपरान्त भण्डारे का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से संजय अग्रवाल, हेमंत भोजवानी, सुनील कर्मचंदानी, प्रेम सिंह धाकड़, घनश्याम हेमलानी, गुलशन मकान, श्रीशक्ति भजन मण्डल के अध्यक्ष हर्ष ढालिया, सुरेन्द्र लाल, अशोक, योगी, अंकित, सुनील, मोहन सिंह, गुलशन, विनोद, प्रीतम आदि उपस्थित थे।