: छत्रपति शिवाजी महाराज की गाथा : भक्ति, नीति और पराक्रम का अद्भुत समन्वय
Wed, Oct 8, 2025
आगरा। कलाकृति कन्वेंशन सेंटर में दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा प्रस्तुत ‘जाणता राजा’ महा नाट्य ने भारतीय इतिहास की उस गौरवगाथा को पुनर्जीवित किया जिसमें धर्म, नीति और राष्ट्रभक्ति का संगम झलकता है। मंच पर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की झांकी ने स्वराज और आत्मगौरव की भावना को प्रभावशाली रूप में साकार किया। बुधवार को पांचवें दिन की नाट्य प्रस्तुति में औरंगजेब के साम्राज्यिक वैभव के समक्ष शिवाजी महाराज की नीतिपूर्ण वीरता का प्रदर्शन दर्शकों के लिए भावनात्मक और प्रेरणादायक अनुभव रहा। शक्ति और साहस से परिपूर्ण उस दृश्य में, जब औरंगजेब प्रतिशोध से भरा होने पर भी शिवाजी महाराज के शौर्य के आगे नतमस्तक होता है, सभागार में तालियों की गूंज और श्रद्धा का मौन एक साथ उपस्थित रहा।
अभिनय, संवाद और साज-सज्जा का समन्वय
कलाकारों के सशक्त संवाद, गंभीर अभिव्यक्ति और जीवंत प्रस्तुति ने हर दृश्य को इतिहास की सांसों से जोड़ दिया। युद्धभूमि, दरबार, और शिवकालीन समाज के दृश्य बारीकी से संयोजित किए गए। प्रकाश, ध्वनि और वस्त्राभूषण का उत्कृष्ट संयोजन दर्शकों को 17वीं शताब्दी की मराठा भूमि में ले गया।
दर्शकों की भावनात्मक सहभागिता
खचाखक भरे परिसर में दर्शकों की उपस्थिति और उत्साह ने यह सिद्ध किया कि ‘जाणता राजा’ केवल एक मंचीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि राष्ट्रगौरव की अनुभूति है। हर प्रसंग पर उमड़ता उत्साह और जयघोष यह दर्शाते रहे कि इतिहास जब मंच पर जीवंत होता है, तो वह पीढ़ियों को जोड़ता है।
सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण
‘जाणता राजा’ महा नाट्य ने यह संदेश दिया कि शिवाजी महाराज का जीवन केवल युद्धों की कथा नहीं, बल्कि धर्म, नीति और स्वराज की आदर्श परंपरा है। यह प्रस्तुति भारतीय संस्कृति की उस अटूट ज्योति का प्रतीक है जो युगों से प्रज्वलित है और आगे भी मार्गदर्शन करती रहेगी।
: शरद पूर्णिमा पर महारास देखने को ठहर गए थे चंद्रमा
Wed, Oct 8, 2025
धवल पोशाक में श्रीहरि और जगमगाते दीपों की श्रंखला से जगमगाया श्रीजगन्नाथ मंदिर
यशोदा दामोदर महोत्सव के रूप में मनेगा कार्तिक उत्सव,
राधा रानी के प्रिय कार्तिक माह में प्रतिदिन दीपों से जगमगाएगा श्रीजगन्नाथ मंदिर
कार्तिक मास दीपदान महोत्सव के प्रथम दिन श्वेत पोशाक में भक्तों को दिए दर्शन
आगरा। शरद पूर्णिमा के दिन ही भगवान माता यशोदा से चंद्रमा पाने की जिद पर मचले थे। आज ही यशोदा मैया ने थाली में चंद्रमा दिखाकर श्रीकृष्ण भगवान को बच्चों की तरह बहलाया था। वहीं महारास का परमानन्द ब्रजवासियों को शरद पूर्णिमा के दिन ही मिला था। जिसे देखने के लिए चंद्रमा भी ठहर गए थे। श्रीहरि की अन्य लीलाएं भी कार्तिक माह में हुई थीं। राधारानी के प्रिय कार्तिक मास दीपदान महोत्सव का शुभारम्भ आज श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कान, कमला नगर) में भक्तिभाव के साथ किया गया। मंगला आरती, संकीर्तन पर 2100 दीपदान के साथ आज सम्पूर्ण मंदिर जगमगा रहा था। आज श्रीहरि ने बहन सुभद्रा व भाई बलराम संग धवल पोशाक में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।
प्रातः 4.30 बजे मंगला आरती के साथ आज कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में कार्तिक मास दीपदान महोत्सव का शुभारम्भ हुआ। जिसमें भक्तों ने दामोदराष्टकम, दीपदान कर तुलसी मैया की आरती की। हरे रामा हरे कृष्णा… संकीर्तन और भगवान के अलौकिक दर्शन ने हर भक्त को भक्ति के सरोबर में डुबकी लगवाई। इस्कान आगरा के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप ने बताया कि कार्तिक मास में प्रतिदिन दामोदराष्टम व गोपीगीत होगा। प्रतिदिन 2100 दीप मंदिर परिसर में प्रज्ज्लित कर दीपदान किया जाएगा। भगवान के विभिन्न वेश और गोपाष्टमी, बैकुण्ठ चतुर्दशी, दीपावली, देवउत्थान एकादशी सहित विभिन्न उत्सव भक्तिभाव के साथ मनाए जाएंगे।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सुशील अग्रवाल, सुनील मनचंदा, आशु मित्तल, संजीव मित्तल, संजीव बंसल, शैलेश बंसल, राजेश उपाध्याय, संजय कुकरैजा, ओमप्रकाश अग्रवाल, शैलेन्द्र, नितेश अग्रवाल, अदिति गौरांगी आदि उपस्थित थे।
10 वर्ष बाद नए सिंहासन पर विराजन हुए भगवान जगन्नाथ
आज शरद पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ बहन सुभद्रा व भाई बलराम संग नए सिंहासन पर विराजमान हुए। श्वेत पोशक धारण किए भगवान के अलौकिक दर्शक को हर भक्त उत्सुक था। मंदिर के अध्यक्ष अरविन्द प्रभु ने बताया कि 10 वर्ष बाद भगवान को शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर नए सिंहासन पर विराजमान किया गया है।
पूरे माह होंगे यशोदा दामोदर के दर्शन
त्रैता युग में दीपावली के दिन श्रीराम अयोध्या वापस आए थे, परन्तु द्वापर युग में दीपावली के दिन यशोदा माता ने भगवान को ओखल से बांध दिया था। यह ऐसी लीला है जिसे कोई देख भी नहीं सका। भक्ति के कारण श्रीहरि माता से प्रेमवश बंधे थे। इसी भक्ति को नमन करने के लिए कार्तिक माह में प्रतिदिन यशोदा-दामोदर के दर्शन होते हैं। श्रीकृष्ण की सभी लीलाएं कार्तिक माह में हुई। गौचारण गिर्राज धरण, महारास, कालिया नाग मर्दन, इंद्र दमन, गोवर्धन पूजा, समुन्द्र मंथन सभी लीलाए कार्तिक मास में हुई। श्रीकृष्ण का जन्म भादों में परन्तु नामकरण कार्तिक माह में ही हुआ था।
: बारिश में भी गूंजे जय भवानी के नारे, ‘जाड़ता राजा महानाट्य’ के तीसरे दिन शिवत्व, सेवा और समर्पण का संगम
Tue, Oct 7, 2025
मुख्य अतिथि रहे हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल प्रो. शिवप्रताप शुक्ल
'शिवाजी की दृढ़ता से पराधीनता अस्वीकार करें, सेवा ही सच्ची तपस्या' : राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल
दिव्य प्रेम सेवा मिशन की संरक्षिका साधना श्री जी माहेश्वरी व संस्थापक अध्यक्ष डॉ आशीष गौतम ने साधना और दृढ़ता का दिया संदेश
आगरा। शरद पूर्णिमा की बरसात के बीच भी दिव्य प्रेम सेवा मिशन के ‘जाड़ता राजा महानाट्य’ का तीसरा दिन भक्तिभाव और राष्ट्रभक्ति के उत्साह से सराबोर रहा।
कलाकृति कन्वेंशन सेंटर परिसर में मंचीय कार्यक्रम वर्षा के कारण स्थगित हुआ, परंतु उत्साह और जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा — “जय भवानी, जय शिवाजी”, “हर हर महादेव” और “राधे-राधे” के उद्घोष ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल प्रो. शिवप्रताप शुक्ल ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की दृढ़ता आज भी भारतीय आत्मा की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि पराधीनता सपने में भी सुख नहीं देती, शिवाजी ने इसे अस्वीकार किया। सेवा ही सच्ची तपस्या है। उन्होंने अपने स्वयंसेवक जीवन के अनुभव साझा करते हुए दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक डॉ आशीष गौतम की त्यागपूर्ण यात्रा को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था—‘सेवा देखनी हो तो आशीष गौतम से मिलें।’ पत्ते पर भोजन से शुरू होकर यह मिशन आज सेवा की पराकाष्ठा पर पहुंचा है।” शुक्ल ने अनुच्छेद 370 हटाने की दृढ़ता का उदाहरण देते हुए युवाओं से आग्रह किया कि वे “जड़ता छोड़ें और हिंदुत्व को जीवन में उतारें”।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन की राष्ट्रीय संरक्षिका साधना श्री जी माहेश्वरी ने वर्षा के बीच भी उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह दैहिक, दैविक या भौतिक ताप नहीं, यह भगवती की विशेष इच्छा है। शरद पूर्णिमा की यह बरसात ब्रजवासियों के लिए शुभ है। उन्होंने आशीष गौतम और संजय भैया के चेहरे पर ‘चिंता की अनुपस्थिति’ को आध्यात्मिक कृपा का प्रतीक बताया। साधना श्री जी ने मिशन की 29 वर्षीय यात्रा को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से जोड़ते हुए कहा कि “रामकथा और श्रीमद्भागवत कथा का दान विश्व स्तर पर हो रहा है यहां विवेकानंद जी कृष्ण स्वरूप में और संजय भैया अर्जुन रूप में प्रकट हुए।”
संस्थापक अध्यक्ष डॉ आशीष गौतम ने कहा कि हिमाचल भगवान शिव की ससुराल है, इसलिए राज्यपाल जी बरसात लेकर आए, यह शुभ संकेत है। उन्होंने मिशन की 29 वर्ष की साधना यात्रा को स्वामी विवेकानंद की राष्ट्रीय चेतना और महावतार बाबा, परमहंस योगानंद, लाहिड़ी महाशय, स्वामी श्री युक्तेश्वर गिरी जैसी गुरु परंपराओं से जोड़ा। एक भावुक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि “ऋषिकेश में एक भिक्षुक मां के निधन के बाद उसके बच्चे को मिशन ने अपनाया, और आज वह डॉ. आर.पी.एन. सिंह के सहयोग से एमडी कर रहा है।” उन्होंने कहा, “जीवों पर दया का दावा न करें, कर्तव्य भाव से सेवा करें, दया तो भगवान शिव की है।”
‘आगरा में शिवाजी की कैद ने हिंदू स्वराज की नींव रखी’ : प्रेम शुक्ला
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने शिवाजी महाराज के आगरा प्रवास को इतिहास की निर्णायक घटना बताते हुए कहा कि अगर औरंगजेब ने आगरा में शिवाजी को कैद न किया होता, तो मुगलों की सत्ता धराशायी न होती। यह आयोजन औरंगजेब की कब्र पर आखिरी कील है। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा की यह वर्षा अमृत वर्षा है, आसमान से अमृत बरसा और आगरा ने पी लिया।
आवश्यक सूचना
जाणता राजा महानाट्य का 6 अक्टूबर का शो भारी बारिश चलते स्थगित होने के कारण जिनके पास 6 अक्टूबर की प्रवेशिका है वे 7, 8 व 9 अक्तूबर में किसी भी दिन महानाट्य देखने आ सकते हैं।
ये रहे उपस्थित
पूर्व कुलपति सुरेन्द्र दुबे जी, वरिष्ठ भाजपा नेता दीपक ऋषि, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय चतुर्वेदी, राघवेंद्र सिंह, मिशन के राष्ट्रीय महामंत्री नितिन अग्रवाल, अपर्णा दुबे, निधि शर्मा, पंकज पाठक, रामय जी, नंदलाल जी, आयोजन समिति के संयोजक ललित शर्मा, महामंत्री अभिनव मौर्य, जयवीर सिंह जी, गोविंद दुबे, नागेंद्र प्रसाद दुबे गामा, दीप विनायक पटेल, ध्रुव गुप्ता, रजत शर्मा, अवधेश शर्मा भट्ठे वाले, सुमित दिवाकर, कान्हा राठौर, विनायक मुद्गल, आशीष पाराशर, कार्तिक प्रधान, आकाश आदि उपस्थित रहे।