: शिवभक्ति की दिव्य धाराः सम्पन्न हुआ द्वितीय महा रुद्राभिषेक महोत्सव
Mon, Jul 14, 2025
श्री गिरिराज जी सेवा मंडल (रजि.) द्वारा आयोजित किया गया द्वितीय महा रुद्राभिषेक महोत्सव
शिवमहिमा से गूंजा अग्रसेन भवन, 121 श्री नर्मदेश्वर शिवलिंगों का वैदिक पूजन और महाअभिषेक
आगरा। सावन का पहला सोमवार और शिवभक्ति की सरिता में डूबा आगरा। लोहामंडी स्थित अग्रसेन भवन में जब ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा, तो मानो कैलाश स्वयं अवतरित हो गया। श्री गिरिराज जी सेवा मंडल द्वारा आयोजित द्वितीय महा रुद्राभिषेक महोत्सव में शिवलिंगों का पूजन और अभिषेक वैदिक मंत्रों के साथ सम्पन्न हुआ, जिसने हर श्रद्धालु को शिवत्व की अनुभूति से भर दिया।
द्वितीय महा रुद्राभिषेक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और वैदिक अनुष्ठानों के साथ दिव्यता में सम्पन्न हुआ। पूरे परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और शिवभक्तों का उत्साह भाव-विभोर कर देने वाला रहा। आचार्य पंडित विष्णु कांत शास्त्री के मार्गदर्शन में हुए आयोजन में 121 श्री नर्मदेश्वर शिवलिंगों का विधिपूर्वक पूजन, अर्चन और रुद्राभिषेक किया गया। लगभग 5 घंटे तक चले इस अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के बीच भगवान शिव का जल, दुग्ध, दही, घी, शहद, गंगाजल, नारियल पानी, गन्ने, अनार का रस और तीर्थ जलों से अभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
विशेष बात यह रही कि नर्मदा नदी से लाए गए पवित्र शिवलिंगों के रुद्राभिषेक में कैलाश मानसरोवर, शिप्रा, ब्रह्मकुंड, सरयू, गोदावरी, यमुना सहित द्वादश पवित्र तीर्थों के जल का प्रयोग किया गया, जिसने अनुष्ठान को और भी दिव्य बना दिया।
संस्थापक नितेश अग्रवाल ने कहा कि यह आयोजन शिवभक्ति के माध्यम से सनातन परंपरा के प्रचार-प्रसार का माध्यम है। अध्यक्ष अजय कुमार सिंघल ने श्रद्धालुओं को रुद्राभिषेक में भाग लेकर शिवकृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
मयंक अग्रवाल ने बताया कि आयोजन स्थल पर ही पूजन सामग्री श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई गई थी, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।
विजय अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम के उपरांत सभी उपस्थितजनों के लिए फलाहार प्रसादी की सुंदर व्यवस्था की गई।
आयोजन में शिवभाव, अनुशासन और सेवा भावना का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया और मनोकामना पूर्ति की कामना के साथ भावपूर्ण आह्वान किया कि हे भोलेनाथ, हमारे जीवन में भी आपकी कृपा का अमृत बरसे।
इस अवसर पर महंत कपिल नागर, नितेश अग्रवाल, विजय अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, अमित पाराशर, आशीष गोयल, सुनील सिंघल, सुमित सिंघल, किशन कुमार गर्ग, नरेंद्र गर्ग, विशाल बंसल, विष्णु बंसल आदि उपस्थित रहे।
: धरोहर बने अखाड़े में सावन रुद्राभिषेक समारोह, पोस्टर विमोचन सम्पन्न
Thu, Jul 10, 2025
आगरा। खिड़की काले खां, मोती कटरा स्थित बाबा धनकामेश्वर नाथ बगीची धन्नामल, जो कभी पहलवानों की तपोभूमि रही है, वहां 11 जुलाई शुक्रवार से सावन रुद्राभिषेक महोत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है। इस अवसर का पोस्टर विमोचन गुरुवार को किया गया।
अध्यक्ष राजेश पायलट और कोषाध्यक्ष राजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि करीब 400 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक बगीची में स्थित मंदिर न केवल आध्यात्मिक केंद्र रहा है, बल्कि इसका अखाड़ा आगरा की पहलवानी परंपरा का गौरव रहा है। यहां दंगल व कुश्ती अभ्यास के माध्यम से ऐसे नाम निकले जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता सरदार दर्शन सिंह, तेज सिंह पहलवान और चांदकी राम जैसे नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उन्होंने बताया कि पूरे सावन मास में 11 जुलाई से 9 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8 से 9:30 बजे तक रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा। यजमानों को पूजन सामग्री स्थल पर ही उपलब्ध कराई जाएगी। पुरुषों से धोती और महिलाओं से ओढ़नी साथ लाने का अनुरोध किया गया है। पूजन आचार्य शास्त्री रमन बिहारी लाल दाऊजी वालों के मार्गदर्शन में संपन्न होगा।
पोस्टर विमोचन से पूर्व सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में आगरा व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, मंत्री राजीव गुप्ता, दुष्यंत गर्ग, बगीची के मंत्री शरण गुप्ता, आकाश उपाध्याय, ब्रजो पहलवान आदि उपस्थित रहे।
: श्री मनःकामेश्वर धाम में गूंजी श्रद्धा की रजत गूंज, भव्य चाँदी द्वार का लोकार्पण
Thu, Jul 10, 2025
शिव के पंच चिन्हों से सुसज्जित, चाँदी का दिव्य द्वार बना आस्था का प्रतीक
प्रदेश में सर्वप्रथम किसी मंदिर में लगा है भव्य रजत द्वार, जिसमें लगी हैं चाँदी की कीलें
आगरा। रावतपाड़ा स्थित, प्राचीन बाबा श्री मनःकामेश्वर नाथ महादेव मंदिर में, भक्तों की आस्था का प्रतीक बनकर, अब एक दिव्य और भव्य रजत द्वार स्थापित हो गया है। यह द्वार न केवल स्थापत्य का अनुपम उदाहरण है, बल्कि श्रद्धालुओं की भक्ति, सहभागिता और संकल्प की सामूहिक अभिव्यक्ति भी है।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, महानगर आगरा के इतिहास में पहली बार, किसी भी मंदिर में, भरपूर श्रद्धा और भक्ति से निर्मित रजत द्वार का विधिवत पूजन और भव्य लोकार्पण किया गया। सर्वप्रथम गणपति पूजन एवं आरती, शटर पर स्वास्तिक पूजन इसके बाद द्वार पर सिंह पूजन एवं लोकार्पण हुआ। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु गद्दी जी पूजन संपन्न के पश्चात प्रसादी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बाबा श्री मनःकामेश्वर नाथ के भव्य फूल बंगला और छप्पन भोग दर्शन का लाभ भी भक्तों ने लिया।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि इस ऐतिहासिक कार्य ने मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की भक्ति को एक नई ऊँचाई दी है। द्वार का निर्माण कार्य, 17 जून 2025 को प्रारंभ हुआ और 20 दिनों के अथक प्रयासों के बाद, आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (10 जुलाई 2025, संवत 2082) को यह पूर्ण हुआ। लगभग पौने 13 फीट लंबा और 12 फीट चौड़ा यह द्वार, कारीगरों की कला और भक्तों की भावना का सुंदर संगम है।
श्रीमहंत योगेश पुरी ने बताया कि यह द्वार बाबा की कृपा और भक्तों की निष्ठा का सजीव उदाहरण है। हर एक चाँदी का टुकड़ा (जो इसमें अर्पित हुआ है) श्रद्धा का प्रतीक है। हम चाहते थे कि बाबा श्री मनकामेश्वर के दरबार में आने वाला हर भक्त दिव्यता और आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव करे और यह रजत द्वार उसी भावना को प्रतिबिंबित करता है।
शिव के पंच चिन्हों से अलंकृत द्वार के दोनों पल्लों पर अत्यंत सुंदर नक्काशी की गई है, जिनमें फूल-पत्तियों के मध्य भगवान शिव के पंच चिन्ह -
ओम, दो सर्प, सिंह मुख, त्रिशूल और डमरू
अत्यंत कलात्मक रूप से उकेरे गए हैं। द्वार में कीलें भी चांदी की ही लगी हैं। यह द्वार अब श्रद्धालुओं के लिए एक नई आध्यात्मिक अनुभूति का प्रतीक बन चुका है।
भक्तों के सहयोग से हुआ निर्माण
रजत द्वार के निर्माण में, समाज के हर वर्ग के श्रद्धालुओं का सहयोग रहा। किसी ने 100 ग्राम तो किसी ने 1 किलो या उससे अधिक चाँदी समर्पित की।
मंदिर में चाँदी से हो रहे अन्य कार्य
हरिहर पुरी ने यह भी बताया कि रजत द्वार के उपरांत, अब मंदिर में बाबा के दरबार से जुड़े कपाट द्वार के बाद, बाबा की वेदी, 11 अखंड ज्योत, अर्धनारीश्वर भगवान का कमल पुष्प तथा बाबा का आवरण स्वरूप भी चाँदी से श्रृंगारित किया जाएगा।
सुरक्षा और स्मृति का प्रबंध
रजत द्वार के आगे स्टील शटर भी लगाया गया है जो रिमोट और स्विच दोनों से संचालित होता है। साथ ही द्वार के एक ओर रजत पट्टिका भी स्थापित की गई है, जिस पर -
निर्माण तिथि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा, संवत 2082 (10 जुलाई 2025)
श्री मन्मनः कामेश्वर विजयतेतराम
श्री मनकामेश्वर रजत द्वार श्री गुरु चरणों में समर्पित, तिलकायत श्री महंत श्री योगेश पुरी जी, मठ प्रशासक श्री हरिहर पुरी जी
उकेरा गया है।