: गायों को चराते हुए निकले कृष्ण- बलराम
Sun, Nov 10, 2024
श्रीकृष्ण लीला कमेटी ने गोपाष्टमी पर निकाली गौचारण यात्रा
आगराः श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के तहत शनिवार को गोपाष्टमी पर गोचारण यात्रा निकाली गई। स्थान-स्थान पर गो पूजन किया गया और कृष्ण-बल्देव की आरती उतारी गई। वाटर वर्क्स स्थित गौशाला स्थित मंदिर में सुबह गौ पूजन किया गया। वेद मंत्रों के साथ यह पूजन अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में गाय को सबसे बड़ा धन माना गया है। गाय ही हमारे जीवन में रची बसी है। मां के बाद गाय का दूध ही बच्चा पीता है, इसलिए इसे मां का सम्मान दिया गया है। पूजन करने वालों में लायंस क्लब खुशबू की अध्यक्ष चेतना सुराना, लायंस क्लब संगिनी की अध्यक्ष ऋतु गोयल, सुजाता अग्रवाल, नीरू रोहतगी, रेनू गोयल, वसुधा अग्रवाल, अंजली बंसल, महिमा अग्रवाल, पीके मोदी, राजेश अग्रवाल, अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, मुकेश मित्तल, विजय रोहतगी, शेखर गोयल, अशोक गोयल, विष्णु, मनोज, आयुष आदि प्रमुख थे।
पूजन के बाद गौशाला से श्रीकृष्ण-बलराम गौचारण यात्रा निकाली गई। जीवनीमंडी, भैरौं बाजार, बेलनगंज चौराहा, कचहरी घाट, छत्ता बाजार, दरेसी नं.2, रावतपाड़ा, सुभाष बाजार, जौहरी बाजार, किनारी बाजार, सेव का बाजार, फुलट्टी, छिलीईंट घटिया, सिटी स्टेशन रोड, धूलियागंज, पथवारी, बेलनगंज तिकोनिया होती हुई गौशाला वापस आई।
: चलने पर चक्कर या लड़खड़ाहट की समस्या है तो कान की जांच कराइये
Sun, Nov 10, 2024
• तीन दिवसीय 32वीं इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी की वार्षिक राष्ट्रीय कार्यशाला में आज प्रस्तुत किए गए 70 शोध पत्र, कल होगा समापन
आगरा। चलते-चलते लड़खड़ाकर गिर जाना या चक्कर आने की समस्या कान की बीमारी के कारण भी हो सकती है। जिसमें लापरवाही आपकी सुनने की क्षमता को प्रभावित करने के साथ बहरापन का कारण भी बन सकती है। न्यूरोलॉजी डिसऑर्डर, डायबिटीज, हृदय रोग के अलावा इस समम्या का सबसे बड़ा कारण (50-60 फीसदी) कान की समस्या है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी में आयोजित तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में कलकत्ता के डॉ. अनिरबन विस्वास ने बताया कि शरीर को संतुलित रखने और सुनने के यंत्र (नसें) दोनों पास-पास होते हैं। किसी एक में समस्या आने पर दूसरे में भी समस्या होने की सम्भावना बढ़ जाती है। 95 फीसदी मामलों में गलत इलाज किया जाता है। जिससे समस्या ठीक होने के बजाय जीवन भर की परेशानी बन सकती है।
डॉ. विस्वास ने बताया कि 50-60 वर्ष की उम्र के बाद लगभग 60 फीसदी लोगों में शरीर को संतुलित रखने की समस्या हो सकती है। परन्तु आजकल गलत जीवनशैली व स्ट्रेस के कारण 30 वर्ष की उम्र में भी इस तरह की परेशानी देखी जा रही है। शरीर में असंतुलन बढ़ने से व्यक्ति में असुरक्षा की भावना पैदा होने लगती है। सामान्यतः इलाज के नाम पर रोग को दबाने का काम किया जा रहा है। जिससे व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, एंजायटी और डिप्रेशन की समस्या भी होने लगती है। जबकि कुछ मामलों में सिर्फ व्यायाम से ही समस्या ठीक हो सकती है। 50 की उम्र के बाद लोगों को फॉल प्रिवेंशन एक्सरसाइज अवश्य करनी चाहिए।
वहीं जयपुर से आए डॉ. ऋषभ जैन ने कहा कि सर्दी जुकाम में लापरवाही (सडन सेंसरी न्यूजल हेयरिंग लॉस) अचानक सुनने की क्षमता को कम कर रही है। कोविड के बाद ऐसे मामले दोगुने हो गए हैं। जिसका कारण वायरल इंफेक्शन या किसी तरह का ब्लड डिसआर्डर हो सकता है। कान में ब्लड सप्लाई की जटिल क्रिया में व्यवधान होने से सुनने की ऑडिटरी नस डेमेज हो जाती है। जिससे सोते-सोते चानक सुनना बंद हो जाता है। यदि सर्दी जिकाम होने पर अचानक सुनने की क्षमता में कमी या, कानों में सिटी जैसा बजना या बिल्कुल सुनाई देना बंद हो जाएं तो तुरन्त कान विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। यह बिल्कुल लकवा जैसी स्थिति है। प्रारम्भिक 24 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं इलाज के लिए। सात दिन के बाद इस समस्या का इलाज करने की सम्भावना कम हो जाती है।
टॉकिंग्स ग्लब्स बनेंगे मूक लोगों की आवाज, भारत ने पैटेंट कराया डिवायज
किसी बीमारी के कारण यदि आप अपनी आवाज खो बैठे हैं (आपके गले स् वॉयज बाॅक्स निकाला जा चुका है) तो अब आपकी आवाज टाकिंग ग्लब्ज बनेंगे। खास बात यह है कि यह मेड इन इंडिया है, जिसे पैटेंट करा लिया गया है। एम्स जोधपुर के डॉ. अमित गोयल द्वारा बनाए गए टॉकिंग ग्लब्स पहनकर कम्प्यूटर पर अंगुलियां चलाने की क्रिया की तरह आप अपनी बात को आवाज के साथ लोगों के सामने रख पाएंगे। डॉ. मित ने बताया कि डिवायज के लिए पैंटेंट ग्रांड हो चुका है। टॉकिंग ग्लब्स हर भाषा में बोलने में सक्षम होंगे, सिर्फ इसके प्रयोग के लिए दो महीने की ट्रेनिंग लेनी होगी। डॉ. अमित ने बताया कि वह सरकार की ओर से सर्जीकल डिवायज बनाने वाले डॉक्टरों व शोधार्थियों को डिवायज को पेटेंट कराने से लेकर मार्केट में लाने तक की भी ट्रेनिंग सरकार की मदद से जगह-जगह दे रहे हैं। बताया कि पिछले 10 वर्षों में बहुत से उपकरण है जिन्हें पहले आयात किया जाता था और अब हम उन्हें एक्सपोर्ट कर रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र में मेड इन इंडिया तेजी से छा रहा है।
10 नवम्बर को होगा समापन
फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी में आयोजित तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में आज 70 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। आयोजन सचिव डॉ. राजीव पचैरी ने बताया कि कार्यशाला में 300 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। कार्यशाला में कनाडा, यूए, श्रीलंका, दुबई, इटली, बंगला देश) देश विदेश के 1200 से अधिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, जिसमें कान बीमारियों व उनके इलाज पर मंथन किया जा रहा है। 10 नवम्बर को दोपहर 12 बजे कार्यशाला का समापन समारोह आयोजित किया जाएगा।
संचालन डॉ. संजय खन्ना व एसएन मेडिकल कालेज ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. रितु गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के अध्यक्ष सतीश जैन, कोषाध्यक्ष डॉ. गौरव खंडेलवाल, मीडिया प्रबारी डॉ. आलोक मित्तल, डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता, डॉ. एलके गुप्ता, डॉ. मनीष सिंघल, डॉ. सलोनी सिंह बघेल आदि उपस्थित थे।
: वैदिक साहित्य में नारी है ब्रह्मवादिनी, आर्य समाज के महिला सम्मेलन में शामिल हुई सैकड़ों महिलाएं
Sun, Nov 10, 2024
आगरा। वैदिक साहित्य में नारी ब्रह्मवादिनी है, देवी है, साम्राज्ञी है, शिक्षिका है, विदुषी है, नेत्री है, उपदेशिका है, पूज्या है और प्रकाशिका है। पति की सर्वोत्तम मित्र और सचिव भी वही है। वैदिक काल मे नारी का क्या स्थान था और आज की स्थिति क्या है, इस पर विचार करने की आवश्यकता है। ये कहना था विजय नगर स्थित विजय क्लब में आर्य समाज नाई की मंडी के 64वें वार्षिकोत्सव समारोह में मुख्य वैदिक वक्ता डॉ. वेद पाल आर्य का। उन्होने कहा कि नारी अगर वेद पढती है, तो निश्चित ही उसका परिवार संस्कारित होगा और तभी वह समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। आचार्य ब्रजेश महाराज ने कहा कि जहां पर नारी का सम्मान होता है, वही देश व समाज आगे बढ़ता है। नारी को समाज के नवनिर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाना होगा तभी एक सभ्य समाज का निर्माण हो पाएगा। स्त्री जाति के लिए उन्होंने शिक्षा के द्वार खोल दिए। आर्य समाज ने नारी सशक्तिकरण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। यही कारण है कि वर्तमान समय में नारी सभी क्षेत्रों में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। इससे पहले प्रातः सत्र में पांच कुंडीय यज्ञ में आर्यजनो ने आहुतियां दी। वेद प्रवक्ता प्रशांत शर्मा ने भी वैदिक ज्ञान की धारा प्रवाहित की।
महिला सम्मेलन का हुआ आयोजन
महिला सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए वंदना आर्या ने कहा कि महर्षि दयानंद ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना के साथ ही महिलाओं को शिक्षित करने, जाति भेद मिटाने और अछूतों का उद्धार करने को अलख जगाई थी। महर्षि दयानंद ने नारी को पुरुष के बराबर का दर्जा दिया। प्रख्यात गायक विवेक पथिक ने आर्यजनो को सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार फना होंगे, एहसान दयानंद के फिर भी ना अदा होंगे…. भारत का कर गया बेड़ा पार, वो मस्ताना योगी जैसे एक के बाद एक भजनो से सभी को भावविभोर कर महर्षि दयानंद का गुणगान किया।
आज होगा 21 कुंडीय महायज्ञ
प्रधान सीए मनोज खुराना ने बताया कि रविवार को समापन पर विश्व कल्याण के लिए 21 कुण्डिय महायज्ञ किया जायेगा। यज्ञ के बाद आचार्यो का प्रवचन होगा। मंच संयोजन अश्वनी आर्य ने किया । इस अवसर पर मंत्री अनुज आर्य, कोषाध्यक्ष विकास आर्य, प्रेमा कनवर, विद्या गुप्ता, कान्ता बंसल, नीरू शर्मा, मिथलेश दुबे, राजेश गुप्ता, राजीव दीक्षित, सुधाकर गुप्ता, भारत भूषण सामा, राजेंद्र मल्होत्रा, वीरेंद्र कनवर, अवनींद्र गुप्ता, सुभाष अग्रवाल, उमेश पाठक, विजय अग्रवाल, यतेंद्र आर्य, सुशील असीजा आदि मौजूद रहे।