: 12 अक्टूबर को धूमधाम से निकलेगी दशहरा शोभायात्रा
Thu, Oct 10, 2024
आगरा। 12 अक्टूबर को प्राचीन मंदिर श्रीरामचंद्र जी महाराज, जटपुरा से दशहरा शोभायात्रा धूमधाम के साथ निकाली जाएगी। इसके लिए दशहरा शोभायात्रा आयोजन समिति मंदिर श्री रामचंद्र जी महाराज जटपुरा खातीपाड़ा लोहामंडी आयोजन समिति का शपथ ग्रहण समारोह लोहामंडी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित किया गया। दशहरा शोभायात्रा के आमंत्रण पत्र का विमोचन कर पदाधिकारियों ने शोभायात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष विनय अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष शोभायात्रा में लगभग 60 आकर्षक झांकियां निकाली जाएंगी। बैंड बाजों संग धूमधाम से दशहरा शोभायात्रा सायं 5 बजे श्रीराम चंद्र मंदिर से प्रारम्भ होकर न्यू राजामंडी, तोता का ताल, बल्देवगंज, लोहामंडी बाजार, राजामंडी बाजार होती हुई सेंट जोंस चैराहे पर पहुंचेगी। जहां 80 फुट ऊंचे रावण का श्रीराम द्वारा वध किया जाएगा। शोभायात्रा में सबसे आकर्षक श्रीराम व रावण की सेना में बीच युद्ध करते वानर व राक्षसों की झांकी होगी। 14 अक्टूबर को राजगद्दी कार्यक्रम का आयोजन अग्रसेन वाटिका बोदला में किया जाएगा। संचालन महामंत्री राजपाल यादव ने किया।
अध्यक्ष विनय अग्रवाल, महेन्द्र खंडेलवाल, राहुल चतुर्वेदी, कार्यकारी अध्यक्ष तरुन सिंह, हेमन्त प्रजापति, राजगद्दी प्रभारी कुमार गुरु कपूर, सर्व व्यवस्था प्रमुख रामदास कटारा, दीपक अग्रवाल, प्रेमा वर्मा, विक्रांत सिंह, दीपक सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल, मौनी पारीक, टीटू पंडित, शिवम मिश्रा, उपाध्यक्ष अजय जैन, अरिहंत जैन, नवयुवक मण्डल संयोजक दीपक सिंह, रोहित शर्मा, संतोष अग्रवाल, तुषार दीक्षित, मुकेश राजपूत, लिली गोयल, आशीष जैन, हर्ष यादव, पंकज कुमार, देव शर्मा, शुभम सिंह, पुष्पेन्द्र चैधरी ने अपने पद की शपथ लेकर शोभायात्रा की जिम्मेदारियों को सम्भाला।
: आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया..सीता राम विवाह प्रसंग में विदाई पर सजल हुए नेत्र
Thu, Oct 10, 2024
श्रीमनःकामेश्वर बाल विद्यालय, दिगनेर में चल रही श्रीमनःकामेश्वरनाथ राम लीला में सीता जी की विदाई के बाद हुई कोपभवन लीला
कन्यादान प्रसंग देख भावुक हुए भक्त,कैकई−मंथरा और कैकई−दशरथ संवाद सुन द्रवित हुआ हृदय
आगरा। विधि विधान संग संपन्न हुआ श्रीराम और सीता सहित चारों भाइयों का विवाह। मंगल गीतों और विवाह की उमंग से चहकती मिथिला नगरी विदाई की घड़ी आते ही सजल हो उठी।
वर−वधू की शाेभा जहां हृदय को उत्साहित कर रही थी तो वहीं विछोह की पीड़ा हृदय द्रवित कर रही थी। दिगनेरवासियों को निज पुत्री की विदाई से अधिक कष्टकारी पीड़ा हाे रही थी जनकनंदिनी की विदाई की बेला में।
बुधवार को गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर स्थित श्रीमनः कामेश्वरनाथ राम लीला के सातवें दिन सीता राम विवाह, कैकई− मंथरा और कैकई संवाद लीला का मंचन कलाकारों ने किया। लीला प्रसंग में प्रिय पुत्र श्रीराम का वधू सहित अन्य पुत्रों का माता कौशल्या, सुमित्रा और कैकई ने अयोध्या नगरी आगमन पर भव्य स्वागत किया। उन्हें हृदय से लगाया किंतु राजा दशरथ ने श्रीराम के राज्याभिषेक की घाेषणा की तो आनंद के क्षणाें को जब मंथरा के शब्दों ने भेद दिया। दूसरों की बातों में आना कितना भंयकर परिणाम दे सकता है ये सीख इस प्रसंग में मिली। मंथरा का मंतव्य न समझ कैकई ने कोप भवन लीला रची और अपने पति राजा दशरथ को वचनों के बंधन में बांध दिया। एक पिता और पति राजा दशरथ जब भाव युद्ध में फंसे तो हर आंख भर आई।
कैकई राजा दशरथ से राम को वनवास और भरत को राजगद्दी के वर मांगती है। राजा दशरथ विनती करते हैं कि राम को वनवास देने का वर मत मांगों। किंतु कैकई कहती है कि ठीक है राजन अपने वचन से मुकर जाओ। राजा दशरथ कहते हैं रघुकुल रीत सदा चली आईा, प्राण जाएं पर वचन न जाई…। इसी प्रसंग के साथ जब लीला का समापन होता है तो हर श्रद्धालु का हृदय व्याकुल हो उठता है।
लीला आरंभ से पूर्व श्रीमहंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने स्वरूपों और श्रीराम चरित मानस जी की आरती उतारी। लीला मंचन कर रहे श्रीकिशाेरी रास एवं राम लीला संस्थान के गोविंद मिश्र ने बताया कि गुरुवार को राम वनवास, केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत आगमन लीला होगी।
: हनुमान मंदिर की पुस्तक ‘‘अतुलित बलधामं’’ का हुआ विमोचन
Thu, Oct 10, 2024
आगरा। प्राचीन सिद्धपीठ, लंगड़े की चैकी हनुमान मंदिर की पुस्तक ‘अतुलित बलधामं’ का विमोचन सादा समारोह में मंदिर प्रांगण में किया गया। इस पुस्तक में आगरा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। वेदमंत्रोच्चारण के साथ मंदिर में हनुमान जी के विग्रह के समक्ष इस पुस्तक को मंदिर के मंहत डोरीदास उपाध्याय और पुस्तक के लेखक-संपादक आदर्श नंदन गुप्ता ने समर्पित किया। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा जयघोष किए गए।
महंत डोरीदास उपाध्याय जी ने बताया कि मंदिर करीब 500 सौ साल प्राचीन है। बहुत ही चमत्कारी विग्रह है। सभी की मनोकामना पूरी होती है। पुस्तक प्रकाशन से मंदिर का इतिहास जन-जन तक पहुंचेगा।
पुस्तक के लेखक आदर्श नंदन गुप्ता ने बताया कि यह पुस्तक प्रमुख उद्योगपति व वरिष्ठ समाजसेवी डाॅ.विजय किशोर बंसल की प्रेरणा और सहयोग से प्रकाशित हुई है। 88 पेज की इस पुस्तक में 24 पेज रंगीन हैं। आगरा का इतिहास व आगरा के कुछ मंदिरों के बारे में आलेख प्रकाशित हैं। कुछ श्रद्धालुओं के अनुभव भी इसमें शामिल हैं।
विमोचन के मौके पर महंत परिवार के गोविंद उपाध्याय, गोपाल उपाध्याय, गोपी उपाध्याय, राम, श्याम, भरत, लखन के अलावा शरद गुप्ता, गोपाल कुशवाह भी मौजूद रहे।