: मृत्युलोक में अमरता का भ्रम होना सबसे बड़ी भूल, श्रीकृष्ण के गोलोक गमन के प्रसंग के साथ कथा का हुआ समापन
Tue, Nov 12, 2024
आगरा। मृत्युलोक में अमरता का भ्रम सबसे बड़ी भूल है। यह आवागमन का रंगमंच है। जहां पर निश्चित क्रियाकलाप के बाद जीव को वापस लौटना होता है। स्वयं योगेश्वर श्रीकृष्ण को भी समय पूरा होने पर गोलोक धाम जाना पड़ा। इस असार संसार का यही मर्म है। इसे समझते और जानते हुए हर व्यक्ति को अपनी सांसारिक जिम्मेदारियां निभाते आत्मकल्याण के पथ पर बढ़ना अनिवार्य है। ये कहना था बोदला सेक्टर-1, स्थित जीवन ज्योति पार्क में चल रही भागवत कथा महोत्सव में सातवें दिन कथावाचक प्रेम प्रकाश महाराज का। मंगलवार को नव योगेश्वर संवाद, श्रीकृष्ण गोलोक गमन वर्णन व व्यास पूजन किया ।
व्यासपीठ से प्रेमप्रकाश महाराज ने कहा कि संसार कर्म क्षेत्र है। यहां सबको क्षमता और अपने विवेक, कार्य कुशलता प्रमाणित करनी पड़ती है। क्योंकि व्यक्तित्व के पहचान की यही कसौटी है। ऐसे में निरंतर कर्म करते हुए हमें सत्संग और साधना के पथ पर चलना होगा। समापन पर श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम श्लोक-नाम संकीर्तनम यस्य सर्व पाप प्रणासनम का श्रद्धालुओं ने वाचन किया, जिसका अर्थ भगवान के नाम संकीर्तन से जीव के सभी प्रकार के पापों-संतापों का नाश होने से है।
मीडिया प्रभारी विमल आगरावाला ने बताया कि बुधवार को सुबह 10 बजे हवन के बाद भंडारे के साथ कथा का समापन होगा। मुख्य यजमान अजय अग्रवाल मघटई और प्रवीणा अग्रवाल है। इस अवसर पर अध्यक्ष केदारनाथ अग्रवाल, संयोजक विवेक अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, अमित गोयल, मुकेश नेचुरल, डॉ. संजय अग्रवाल, प्रतिभा जिंदल, मनोज शर्मा, शम्बूनाथ अग्रवाल, माधव, राधव, मनीष, अजय आदि मौजूद रहे।
: संदेशा खुशियों का लाया, जन्मदिन श्याम बाबा का आया
Tue, Nov 12, 2024
श्रीखाटू श्याम बाबा के जन्मोत्सव पर हुए स्वर्ण श्रृंगार दर्शन
देव उठनी एकादशी पर मंदिर में मेवा, फूल, टाफी मोर मुकुट की हुई भव्य सजावट
श्याम बाबा के दर्शन को उमड़ा आस्था का रेला, रात्रि को भजन संध्या के साथ हुई भव्य आतिशबाजी
आगरा। देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर जीवनी मंडी स्थित श्रीखाटू श्याम जी मंदिर में भव्यता के साथ श्याम बाबा का जन्मोत्सव मनाया गया। खाटू नरेश के दर्शन को आए हजारों भक्तों ने हर के सहारे बाबा श्याम हमारे की जय जयकार से दिन भर मंदिर को गूंजायमान किया। भव्य सजावट के बीच दिव्य छप्पन भोग रात्रि को भजन संध्या के बाद आतिशबाजी का नजारा देखने को मिला। सुबह से ही श्याम बाबा के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। झिलमिल रोशनी से जगमगाते मंदिर में छप्पन भोग के दर्शन भक्तों को खूब लोभ रहे थे। देसी विदेशी फूलों की 101 मालाओं से श्रृंगारित इत्र की खुशबू से महक रहे श्याम बाबा की अलौकिक छवि देखते ही बन रही थी। पूरे दिन मंदिर आने वाले बच्चों को टॉफी चॉकलेट और खिलौने बांटे गए।
छप्पन भोग का लगाया प्रसाद
मंदिर टेस्ट के अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल ने बताया कि देवोत्थान एकादशी पर खाटू नरेश का जन्मोत्सव हर वर्ष की बात इस वर्ष भी भक्ति भाव से मनाया गया है। इस अवसर पर मंदिर को देसी विदेशी फूलों के साथ टोफियों, चॉकलेट से आकर्षक रूप से सजाया गया है। सचिव संजय अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विकास बंसल ने बताया कि रात में बाबा श्याम के गुणगान के लिए भजन संध्या का आयोजन हुआ है।
मेरे खाटू वाले का जन्मदिन आया है भजन पर झूमे भक्त
जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम मंदिर में उसे समय बाबा श्याम की जय जयकार से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा श्याम भजन गायक अनूप गोयल और प्रबल गोयल ने मेरे बाबा का जन्मदिन आया है मंदिर को खूब सजाया है गाकर भक्तों की जमकर तालियां बटोरी। संदेश खुशियों का लाया जन्मदिन श्याम बाबा का आया भजन पर भक्त मंत्र मुक्त होकर झूम उठे। विपिन बंसल और संजय अग्रवाल ने बताया कि इस मौके पर बाबा के जयकारों के साथ भक्तों ने जमकर आतिशबाजी की। शहर के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा के दर्शन को पहुंचे सुबह से लेकर देर रात तक श्याम बाबा की जय जयकार से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
जन्मोत्सव पर इनकी रही सेवा
खाटू नरेश की जन्मोत्सव पर जीवन मंडी मंदिर में श्रृंगार सेवा महेश फार्मा, पोशाक सेवा कृष्ण, इत्र सेवा सुचिता अग्रवाल, फूल बंगला सेवा महेश फार्मा आगरा, खिलौना एवं सजावट सेवा श्री श्याम सेवक समिति आगरा, बाबा की लाइटिंग सेवा सुभाष चंद्र अग्रवाल ने की।
रात 12:00 बजे तक खुला रहा बाबा का दरबार
देवोत्थान एकादशी के अवसर पर जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम मंदिर में खाटू नरेश का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया इस मौके पर सुबह से शाम तक भजन संध्या के साथ देर रात्रि 12:00 बजे तक भक्तों ने भक्ति भाव से अपने आराध्य देव के दर्शन किए।
: मनकामेश्वर मंदिर में देवोत्थान एकादशी पर हुआ तुलसी शालिगराम विवाह
Tue, Nov 12, 2024
भगवान शालिग्राम संग परिणय सूत्र में बंधी तुलसी महारानी
सैकड़ो भक्तों ने श्रद्धा भाव से कन्यादान कर विवाह में लिया भाग
आगरा। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठावनी एकादशी कहते हैं। इस दिन 4 महीने के विश्राम के बाद भगवान नारायण जागते हैं। देवोत्थान एकादशी पर तुलसी शालिगराम विवाह की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।देवोत्थान एकादशी पर श्री मन:कामेश्वर मंदिर में भगवान शालिग्राम संग तुलसी परिणय सूत्र में बंधी। रावतपाड़ा स्थित श्री मन:कामेश्वर मंदिर में तुलसी शालिगराम विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से संपन्न हुआ।
इस मौके पर तुलसी शालिग्राम शोभायात्रा भी धूमधाम से निकाली गई। पिछले एक दशक से आयोजित शोभायात्रा में फूलों से दुल्हन की तरह सजीं तुलसी महारानी को मंदिर के महंत योगेश पुरी ने अपने शीश पर रखकर फूलों से सजी बग्घी पर भगवान शालिग्राम दूल्हे के रूप में बिराजे। इस मौके पर तुलसी महारानी और भगवान शालिग्राम का श्रंगार भक्तों के मन को मोह लेने वाला था। यात्रा में आगे आगे गणपति के प्रतीक स्वरूप हाथी तो पीछे-पीछे ढोल ताशा बैंड बाजा संग श्रद्धालु नाचते गाते हुए चल रहे थे। यात्रा की शुरुआत से पहले बारात की सभी रस्में में पूरी की गईं। विद्वान आचार्य ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शालिग्राम और तुलसी का पूजन कर आरती उतारी। शोभा यात्रा के दौरान रास्ते में आतिशबाजी भी होती रही रास्ते में जगह-जगह भगवान के रथ को रोक कर श्रद्धालुओं ने फूल बरसा कर आरती की।
वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ पाणिग्रहण संस्कार
देव उठावनी एकादशी के अवसर पर प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर में भव्य सजावट की गई। तुलसी महारानी और शालिग्राम भगवान को मंडप में विराजमान कराया गया। इसके बाद शुरू हुआ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुरोहित विधि विधान से पांणिग्रहण संस्कार कर रहे थे। विवाह के अवसर पर भक्तों ने तुलसी महारानी का कन्यादान किया। करीब 2 घंटे तक चले कन्यादान कार्यक्रम के बाद फेरे कराए गए। जिसमें राजेश-अंजू अग्रवाल, रोहित-सोनिया गर्ग, राहुल-नीलिमा गुप्ता आदि भक्तों ने भगवान शालिग्राम की शिला को उठाया और उनकी पत्नी ने तुलसी महारानी के पौधे को हाथों में लेकर फेरे लिए।
सदियों पुरानी है परंपरा
तुलसी शालिग्राम विवाह की यह देव उठावनी एकादशी एकादशी के दिन तुलसी महारानी और भगवान शालिग्राम के उत्सव के बारे में मंदिर के महंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहरपुरी ने बताया कि वृंदा ने भगवान नारायण को श्राप दिया था कि वह पत्थर के बन जाएं। तभी से भगवान शालिग्राम के रूप में परिवर्तित हो गए इसके बाद जब लक्ष्मी जी को पता चला कि नारायण शिला के रूप में हो गए हैं तो उन्होंने बांदा को कहा कि वह जड़ बन जाएं। इसके बाद भगवान विष्णु ने कहा कि उनकी शिला के ऊपर जब तक जड़ वृंदा रानी यानी तुलसी का पत्ता नहीं अर्पित किया जाएगा तब तक उनको अर्पित किया भोग स्वीकार नहीं होगा। इसके अलावा उन्होंने शालिग्राम रूप में देव उठावनी एकादशी के दिन तुलसी से विवाह किया। तभी से यह परंपरा आज भी ब्रज के मंदिरों में निभाई जा रही है।