: युवा पीढ़ी में संस्कृति और संस्कार के संचार को इस्कॉन कराएगा गीता ओलम्पियाड
Wed, Oct 9, 2024
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लगभग 50 हजार बच्चों को पढ़ाया गीता सार, एक लाख का लक्ष्य,
• ऑनलाइन सहित विभिन सकूलों में कक्षा 6-12 के विद्यार्थियों को इस्कॉन दे रहा गीता की क्लास
आगरा। युवा पीढ़ी भारतीय परम्पराओं, संस्कृति और संस्कार से जुड़ी रहे, इसके लिए इस्कॉन द्वारा शहर के विभिन्न स्कूलों में गीता सार पढ़ा कर नैतिक, सामाजिक व पारिवारिक शिक्षा दी जा रही है। अब तक लगभग 100 से अधिक स्कूलों के 50 हजार विद्यार्थियों को गीता सार पढ़ाया जा चुका है, लक्ष्य एक लाख बच्चों को शिक्षित करने का है। सभी विजेता प्रतिभागियों को आकर्षक उपहार प्रदान किए जाएंगे। दिसम्बर माह में सूरसदन में इंटरनेशनल गीता ओलम्पियाड का पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा।
श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप प्रभु ने आज मंदिर परिसर में इंटरनेशनल गीता ओलम्पियाड के आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रम में जानकारी देते हुए बताया कि अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर होते बच्चों को हमने अभी नहीं सम्भाला तो आगे बहुत विषम परिस्थियां पैदा हो जाएंगी। गीता ओलम्पियाड भविष्य की पीढ़ी को जागरूक करने के लिए छोटा सा प्रयास है। जिससे टूटते परिवार, घर-घर कलह, तलाक, अकेले या वृद्धाश्रम में गुजर कर रहे वृद्ध, जैसी सामाजिक समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके। इस अवसर पर मुख्य रूप से मनोज अग्रवाल, प्रभा गर्ग, शाश्वत नंदलाल, राजेश उपाध्याय, ओमप्रकाश अग्रवाल, काजल, हिमांशु, संजय कुकरैजा, गजेन्द्र, प्रभा गर्ग आदि उपस्थित थीं।
अब तक 100 स्कूलों के 50 हजार बच्चों को पढ़ाया गीता सार
इस्कॉन की अदिति गौरांगी ने बताया कि शहर के सभी छोटे बढ़े लगभग 100 स्कूलों में (मिशनरी स्कूलों को छोड़कर) कक्षा 6-12 तक के विद्यार्थियों के लिए गीता सार की क्लाससेज ली जा चुकी हैं। क्लास के एक हफ्ते बाद 50 नम्बर की परीक्षा होती है। इसके उपरान्त प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। अरविन्द स्वरूप प्रभु ने कहा कि मिशनरी स्कूलों में धर्मनिर्पेक्ष शिक्षा की बात कर वहां अनुमति मिलने में दिक्कत आती है। फिर भी जो बच्चे या अभिभावक गीता की शिक्षा अपने बच्चों को देना चाहते हैं, उनके लिए ऑनलाइन क्लासेस भी ली जाती हैं। बच्चे मात्र 40 रुपए में बार कोड या 9927091147 नम्बर पर सम्पर्क कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
: विभीषण पहुँचे प्रभु श्रीराम की शरण में, हुआ अंगद-रावण का संवाद
Wed, Oct 9, 2024
आगरा। लीला के प्रारंभ में हनुमानजी द्वारा माता का हाल बताने के बाद प्रभू श्री राम लंका की ओर जाने का आदेश देते हैं तभी लंका के इस ओर समुद्र है। जामवन्त जी द्वारा बताया जाता है कि नल और नील प्रभू श्री राम का नाम पत्थर पर लिख कर समुद्र में डाले तो पत्थर समुद्र में डूबेगे नहीं। प्रभू श्री राम द्वारा समुद्र पर पुल बनाये जाने के पूर्व भगवान शंकर की पूजा की जाती है तथा रामेश्वरम् की स्थापना की जाती है। इसके बाद नल और नील द्वारा सेतु बनाया जाता है।
उधर विभीषण के अपने भाई रावण को समझाने पर भी रावण की समझ में नहीं आती है तथा विभीषण को लका से निष्कासित कर दिया जाता है। विभीषण द्वारा अपनी माता से आज्ञा लेकर प्रभु श्री राम की शरण में आना। प्रभू श्री राम द्वारा विभीषण का राज्य तिलक करना। तभी दशानन के दरबार से एक राक्षस भेष बदलकर वानर सेना में आता है। हनुमान जी द्वारा पहचान लेने पर उसे दण्डित किया जाता है। लक्ष्मण जी द्वारा एक पत्र रावण के लिए उस राक्षस को देकर छोड़ा जाता है। वह राक्षस दशानन के दरबार में जाकर पूरी बात बताता है।
प्रभू श्री राम लंका के द्वार पर पहुंचते है तथा एक बार और दशानन को माता जानकी को ससम्मान छोड़ने के लिए दूत के रूप में युवराज अंगद को लंका भेेजा जाता है। जहां दशानन द्वारा अंगद को बैठाया नहीं जाता है। युवराज अंगद द्वारा अपनी पूंछ बढ़ाकर अपने लिये सिंहासन तैयार किया जाता है तब रावण व अगद में संवाद होता है। अंगद के काफी समझाने पर भी रावण माता जी को वापस भेजने के लिए तैयार नहीं होता है।
दशानन द्वारा युवराज अंगद को दण्डित करने का आदेश दिया जाता है। मुवराज अंगद द्वारा कहा जाता है कि अगर आप में से कोई योद्धा है तो मेरा पैर उठाकर दिखाये। सारे योद्धा अजमाइश करते हैं परन्तु सफल नहीं होते। अंत में स्वयं दशानन उठते है तभी युवराज अंगद द्वारा दशाशन से कहा जाता है कि मेरे पैर पकड़ने में क्या है अगर पैर पकडने है तो प्रभू श्री राम के पैर पकडों इसी में आपका कल्याण है और सभा से लौट आते है। प्रभू श्री राम को सारा वृतान्त बताते है।
खचाखच दर्शकों से भरे रामलीला मैदान में वानर सेना के पात्र तथा दशानन सेना के पात्र अपनी वाक पटुता से दर्शकों को अपनी ओर रिक्षा रहे है। वानर सेना और दशानन सेना का उत्साह देखते ही बनता है। नवरात्रि के पावन पर्व लीला के शुभारम्भ की आरती उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मन्त्री योगेन्द्र उपाध्याय द्वारा की गयी, उनके साथ किन्नर समाज द्वारा भी आरती की गई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की भव्य आरती में किन्नरों में रूबी, सोनू, बांद, अनु और काजल प्रमख रुप से उपस्थित रहे।
विभिन्न संस्थाओं द्वारा लीला समापन की आरती की गई जिसने प्रमख रूप से रोशन मोहल्ला व्यापार समिति, आगरा नरेश श्याम भक्त पोशाक सेवा समिति, हेल्प आगरा, आगरा विकास मंच आगरा आदि संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे।
रामलीला में आज
रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राहुल राहुल गौतम द्वारा बताया कि 09 अक्टूबर 2024 को लक्ष्मण शक्ति की लीला होगी। इसी के साथ रामलीला मैदान पर राम-रावण के युद्ध की शुरूआत हो जायेगी। रामलीला मैदान पर दोनों ओर से रथों पर बैठ कर राम-रावण के युद्ध की लीला आयोजित होगी। दोनों ओर से तीरों की वर्षा होगी तथा राम और रावण के बीच घोर संग्राम होगा।
09 अक्टूबर को होगा संगीतमय सुन्दर काण्ड
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल द्वारा बताया गया कि आज शेषावतार को शक्ति की लीला है। शक्ति की लीला के उपलक्ष्य में रामहनुमान मन्दिर पर लाला चन्द्रभान साबुन वालों के शिब्बी मल जी द्वारा संगीतमय सुन्दर काण्ड का पाठ सायं 4ः00 बजे से किया जायेगा तथा भव्य फूल बंगला भी सजेगा। सुन्दरकाण्ड के पश्चात प्रसाद वितरण होगा। सभी भक्तजनों से अनुरोध है कि भगवान के दर्शन करें।
: कुअंरु कुअंरि कल भावंरि देहीं, नयन लाभु सब सादर लेहीं
Tue, Oct 8, 2024
श्रीमनःकामेश्वर बाल विद्यालय, दिगनेर में चल रही है श्रीमनः कामेश्वरनाथ राम लीला
चतुर्थ दिन लीला में हुआ धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और परशुराम संवाद लीला मंचन
मंगलवार को निकलेगी राम बरात, दुल्हन की तरह सजधज कर तैयार हुआ दिगनेर
आगरा। हर्षित हुए सब नर नारि, पुलकित हो उठी सृष्टि ही हर फुलवारी। श्रीहरि विष्णु नारायण के अवतार श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, होने लगी देवलोक से पुष्प वर्षा अतुलित। गढ़ी ईश्वरा, ग्राम दिगनेर, शमशाबाद रोड स्थित श्रीमनः कामेश्वर बाल विद्यालय में चल रही श्रीमनःकामेश्वरनाथ रामलीला के चतुर्थ दिन सोमवार को धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और परशुराम संवाद प्रसंग का मंचन हुआ। प्रसंग में जनकपुर में निवास कर रहे राम, लक्ष्मण व मुनि विश्वामित्र को राजा अपने मंत्री सतानंद को भेज स्वयंवर में आने का निमंत्रण भेजते हैं। मुनि विश्वामित्र के साथ पहुंचे, श्रीराम व लक्ष्मण की शोभा स्वयंवर में उपस्थित समस्त राजा आश्चर्य से देखते हैं। रंग भूमि में उपस्थित राक्षस राज रावण, बांणा सुर सहित अनेक राजा धनुष उठाने में असमर्थ होकर चले जाते हैं। वहीं कुछ अपना बल पौरुष दिखाकर लोगों के हंसी का पात्र भी बनते हैं।
राजा जनक परेशान होकर टिप्पणी कर देते हैं , जिसे सुन लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं। मुनि विश्वामित्र के आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष उठाने चलते हैं। सखियां श्रीराम को हाथों धनुष टूटने की भगवान गणेश से प्रार्थना करती हैं। महारानी सुनयना एक बालक के हाथों धनुष तोड़े जाने में संदेह जताती हैं। शर्त रखने के लिए राजा जनक को कोसती हैं। सीता मन ही मन स्तुति करती हैं। इस बीच धनुष की प्रत्यंचा खिंचते ही वह तीन खंडों में विभक्त हो जाता है। लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें, काहुं न लखा देख सबु ठाढें। चौपाई गूंजती है और मंगल गीत के बीच सीता जयमाला लेकर रंगभूमि में आती हैं।
शिव के धनुष टूटने की सूचना से परशुराम क्रोधित होकर जनकपुर पहुंचते हैं। लक्ष्मण− परशुराम संवाद होता है। विश्वामित्र परशुराम का क्रोध शांत कराते हुए श्री राम जी को नारायण का अवतार कहते हैं। यह सुन परशुराम श्रीराम को अपना रमापति धनुष देकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने को कहते हैं। श्रीराम के प्रत्यंचा चढ़ाते ही परशुराम का संशय दूर हो जाता है वे श्रीराम की स्तुति कर लौट जाते हैं।
लीला मंचन से पूर्व श्रीमहंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने श्रीलक्ष्मी नारायण के स्वरूपों की आरती उतारी।
राम बरात के लिए सजी मिथिला नगरी दिगनेर
श्रीमहंत योगेश पुरी ने बताया कि अवधपुरी बना दिगनेर मंगलवार को जनकपुर की भांति शाेभित होगा। यहां मंगलवार को भव्य राम बरात निकाली जाएगी, जिसमें चारों भाइयों के स्वरूप होंगे। बरात की अगुवायी गुरु वशिष्ठ के स्वरूप में श्रीमहंत स्वयं करेंगे। राम बरात को लेकर उत्साहित स्थानीय लोगों ने हर सड़क, हर चौराहे को रंगोली और लाइटिंग से सजा दिया है। घरों की चौखटों पर महिलाओं ने तोरण लगा दिए हैं। त्रेता की सजीव झांकी की भांति इस वक्त दिगनेर का वातावरण बन चुका है। श्रीराम वरयात्रा में विभिन्न झांकियां भी निकाली जाएंगी। आगरा शहर से बड़ी संख्या में लोग आयोजन में भाग लेने के लिए पहुंचेंगे। आयोजन का लाइव प्रसारण श्रीमनःकामेश्वर मंदिर सहित शहर के विभिन्न चौराहाें और विदेशाें तक में किया जा रहा है।
30 वर्ष पूर्व बिजली को तरसता था दिगनेर
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि आज जहां श्रीराम लीला का मंचन हो रहा है, रंग बिरंगी रोशनी से पूरा क्षेत्र सजा हुआ है वहां करीब 30 वर्ष पूर्व 1993 में बिजली, महानगर बस सेवा, टेलिफोन, सड़क आदि संसाधन जुटाने के लिए स्थानीय लोगों ने आंदोलन की तैयारी की थी। सुविधा और विकास के लंबे अंतराल के बाद आज दिगनेर में श्रीराम की लीला का मंचन और शहरी क्षेत्र की भांति राम बरात का आयोजन होना संभव हो सका है।